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यह कैसा पहाड़ प्रेम, ग्रीष्मकालीन राजधानी पहाड़ में और निदेशालय दून में

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चौबटिया का प्रख्यात उद्यान निदेशालय का भवन। संवाद न्यूज एजेंसी - फोटो : RANIKHET
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रानीखेत (अल्मोड़ा)। सरकार का यह कैसा पहाड़ प्रेम है, एक तरफ गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाया गया है, दूसरी तरफ पहाड़ में स्थापित मुख्य संस्थानों को अन्यत्र शिफ्ट किया जा रहा है। जबकि अविभाजित उत्तर प्रदेश राज्य में भी सभी महत्वपूर्ण विभागों के निदेशालय पहाड़ों में ही स्थातिप किए गए थे। शिक्षा विभाग, रेशम विभाग, खादी बोर्ड, कृषि विभाग का निदेशालय पर्वतीय विकास मंत्रालय के अधीन नैनीताल, अल्मोड़ा, पौड़ी में स्थापित किए गए थे।
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उत्तराखंड पृथक राज्य आंदोलन के पीछे अवधारणा यही थी कि विकास से पिछड़ रहे पर्वतीय क्षेत्र का विकास हो, लेकिन राज्य बनने के बाद सबसे अधिक दुर्गति पहाड़ों की हो रही है। उत्तराखंड राज्य बनने के बाद सभी महत्वपूर्ण निदेशालय पहाड़ों से हटाकर देहरादून में ले जाए जा रहे हैं। चौबटिया में स्थापित उद्यान निदेशालय को अब देहरादून शिफ्ट करने की तैयारी चल रही है। उद्यान मंत्री ने बाकायदा इसका अनुमोदन कर फाइल मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत को भेज दी है। अब इस मसले को लेकर सियासत गर्म है। जानकार त्रिवेंद्र रावत सरकार पर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि एक तरफ सरकार गैरसैंण में ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने की बात कर रही है वहीं सभी विभागों के निदेशालय देहरादून स्थानांतरित किए जा रहे हैं। उनका कहना है कि पहाड़ों के सभी बड़े निर्माण कार्य राज्य से बाहर की एजेंसी कर रही हैं। आरोप लगाया कि पहाड़ की अर्थव्यवस्था को कमजोर किया जा रहा है। लोगों का कहना है कि निदेशालय को पहाड़ में स्थापित करने के पीछे यह उद्देश्य था कि पहाड़ से पलायन रुके। चेतावनी दी कि यही स्थिति रही तो पहाड़ बचाने के लिए वृहद आंदोलन शुरू करना होगा।
पर्वतीय राज्य के इतिहास में यह पहली बार हो रहा है कि राज्य की ग्रीष्मकालीन राजधानी पहाड़ों में और पहाड़ों में पहले से स्थापित विभागों के निदेशालय मैदानों में स्थानांतरित किए जा रहे हैं। यह त्रिवेंद्र सरकार का दोगलापन है। इन हालात में कैसे सरकार पहाड़ प्रेम दर्शा रही है। चौबटिया से निदेशालय हटा तो वृहद आंदोलन होगा।
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- दिनेश तिवारी, पूर्व उपाध्यक्ष विधि आयोग।
चौबटिया का उद्यान निदेशालय रानीखेत ही नहीं पूरे कुमाऊं क्षेत्र की शान है। इसे शिफ्ट करने का फैसला ठीक नहीं है। इसके लिए स्थानीय नेतृत्व जिम्मेदार है। उन्हें इसके लिए संघर्ष करना चाहिए था। इस मसले को लेकर शीघ्र ही मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से मुलाकात होगी और निदेशालय के महत्व को लेकर चर्चा की जाएगी।
- धन सिंह रावत, जिला पंचायत सदस्य, भाजपा नेता रानीखेत।
चौबटिया उद्यान निदेशालय को शिफ्ट करने का फैसला किसानों के हित में नहीं है। किसान छोटी-छोटी समस्याओं के निराकरण के लिए देहरादून कैसे जा पाएगा। अब गेंद मुख्यमंत्री के पाले में है। उन्हें इस संबंध में विचार करना चाहिए। निदेशालय पहाड़ में रहेगा तो कुमाऊं क्षेत्र का विकास होगा। उम्मीद है कि सरकार यह गैर जरूरी कदम नहीं उठाएगी।
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-डॉ. प्रमोद नैनवाल, संयोजक पहाड़ बचाओ, पलायन रोको संगठन।
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