अल्मोड़ा। अनियंत्रित गति से पांव पसार रहा मधुमेह जिंदगी की मिठास को फीकी कर रहा है। खानपान में लापरवाही के कारण अस्पतालों में मधुमेह के रोगी बढ़ रहे हैं। जिला अस्पताल की ओपीडी में मधुमेह के प्रतिदिन करीब 40 से अधिक रोगी आते हैं। इनमें औसतन 10 से अधिक युवा होते हैं।
35 से 40 आयु वर्ग के लोग भी अब टाइप-2 डायबिटीज का शिकार हो रहे हैं। बच्चे भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। चिकित्सकों के मुताबिक बच्चों में इस समस्या के पनपने की सबसे बड़ी वजह यह है कि वह बाहर से खाना मंगाकर खा रहे हैं। यही नहीं उनका स्क्रीन टाइम बढ़ गया है।
नींद पूरी नहीं हो रही है और कसरत, व्यायाम के लिए भी उनके पास समय नहीं है। यदि प्री डायबिटीज की अवस्था में आने के बाद भी सजग हो जाएं तो मधुमेह को नियंत्रित किया जा सकता है पर ज्यादातर लोग इसे हल्के में लेते हैं।
मधुमेह साइलेंट किलर की तरह शरीर को धीरे-धीरे कमजोर कर देता है। शरीर के महत्वपूर्ण अंग जैसे किडनी, आंखें आदि गंभीर रूप से प्रभावित हो जाने से शारीरिक दिक्कतें आ जाती हैं। मधुमेह अब केवल वृद्धों तक ही सीमित नहीं है। 30 वर्ष से कम आयु के लोगों में भी हाई ब्लड शुगर की समस्या देखी जा रही है।
60 की उम्र के बाद ये बीमारी और खतरनाक हो सकती है। जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. हरीश आर्या ने बताया कि मधुमेह को समय पर नियंत्रित नहीं किया गया तो इससे हृदय और गुर्दे की बीमारी होने का भी खतरा रहता है।