राजकीय प्राथमिक स्कूल देवायल की हालत खस्ता है। स्कूल के भवन की स्थिति इतनी बदतर हो गई है कि वहां बच्चों का बैठना मुश्किल हो गया है।
दो कमरे काफी जीर्ण हालत में हैं जबकि जिन दो कमरों में पांच कक्षाएं चल रही हैं उनकी भी दशा भी काफी खराब है और वहां भी बच्चे मजबूरी में बैठ रहे हैं। अमर उजाला टीम ने शनिवार को इस स्कूल का भ्रमण किया। टूटे फूटे दो कमरों में पांच कक्षाएं चल रही थीं और पांचों कक्षाएं एक शिक्षक के हवाले थीं।
राजकीय प्राथमिक स्कूल देवायल 1950 के दशक का है। वर्तमान में इस विद्यालय में 40 बच्चे पढ़ते हैं। इस स्कूल की दशा भी ग्रामीण क्षेत्र के अन्य स्कूलों जैसी ही है। व्यवस्थाएं अस्त-व्यस्त होने के कारण विद्यालय में पढ़ाई का स्तर लगातार गिर रहा है।
प्राथमिक स्कूल के भवन की जीर्ण हालत को देखते हुए 2003-04 में इसका जीर्णोद्धार किया गया, लेकिन पिछले कुछ सालों में भवन की दशा काफी खराब हो गई है। दो कमरों की हालत इतनी खराब है कि उनमें कक्षाएं नहीं चलाई जाती। अन्य दो कमरों में पांच कक्षाएं चलती हैं। इनमें एक कमरे में कक्षा एक से तीन तक और दूसरे में चौथी तथा पांचवीं तक के बच्चे पढ़ते हैं।
जिन दो कमरों में कक्षाएं चल रही हैं उनकी दशा भी काफी खराब है। फर्श टूटकर खराब हो चुका है और बड़े-बड़े गड्ढे बन चुके हैं। जब दिन में करीब 12 बजे यह संवाददाता स्कूल में पहुंचा वहां फटी चटाइयों में बैठे पांचों कक्षाओं को एक शिक्षक पढ़ा रहे थे।
शिक्षक ने बताया कि प्रधानाध्यापक छुट्टी पर हैं। पांचों कक्षाओं को एक साथ पढ़ाना संभव नहीं था इसलिए वहां तैनात शिक्षक एक तरह से पांचों कक्षाओं के बच्चों की पहरेदारी कर रहे थे।
उधर ग्राम प्रधान गोपाल सिंह रावत ने बताया कि इस स्कूल के भवन का जीर्णोद्धार करने के लिए कई बार बीडीसी में प्रस्ताव लाया गया है लेकिन आज तक फर्श को तक दुरुस्त नहीं कराया गया है।