रानीखेत (अल्मोड़ा)। ऐतिहासिक स्वर्गपुरी पांडवखोली में महंत बलवंत गिरि महाराज की पुण्यतिथि पर हुए समारोह में रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम रही। इस अवसर पर आयोजित भंडारे में सैकड़ों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। महिलाओं, बच्चों के बीच हुई विभिन्न प्रतियोगिताओं में अनेक लोगों ने प्रतिभा दिखाई। जड़ी-बूटियों के स्टाल लगाए गए। लकड़ी के जड़ों से निर्मित कलाकृतियों की प्रदर्शनी लगाई गई। अब यह स्थल पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होने लगा है।
पथ भ्रमण संघ और आश्रम समिति की ओर से मंदिर के संस्थापक महंत बलवंत गिरि महाराज की पुण्यतिथि पर कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। भंडारे के दौरान सांस्कृतिक, खेल गतिविधियों का आयोजन किया गया। ग्रामीण महिलाओं, बच्चों के बीच दौड़, कुर्सी दौड़ सहित तमाम प्रतियोगिताएं हुई। भंडारे में सैकड़ों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। पांडवखोली को महाभारतकाल की घटनाओं से जोड़कर देखा जाता है।
कहते हैं कि पांडवों ने यहीं अज्ञातवास काटा था। पर्यटन नगरी से पांडवखोली जाने के लिए 60 किमी की दूरी कुकूछीना जाना पड़ता है यहां से साढ़े तीन किमी की खड़ी चढ़ाई पार करने के बाद पांडवखोली जैसे दिव्य, एकांत स्थल के दर्शन होते हैं। पांडवखोली से हिमालय, सनराइज, सनसैट के विहंगम दृश्य दिखाई देते हैं।
इसी के चलते यहां देशी, विदेशी पर्यटक खिंचे चले आते हैं और कई दिन तक यहां ध्यान लगाते हैं। यहां पर बुग्यालनुमा स्थल है। कहा जाता है कि इसी स्थल पर भीम आराम करते थे। भ्रमण संघ के अध्यक्ष हरीश शाह ने सहयोग के लिए सभी का आभार जताया है।