जागेश्वर (अल्मोड़ा)। प्रसिद्ध जागेश्वर धाम में प्रबंधन समिति के अभाव से व्यवस्थाएं पूरी तरह चरमरा गई हैं। बीते डेढ़ वर्षों से मंदिर की प्रबंधन समिति का गठन नहीं होने का खामियाजा मंदिर में पहुंच रहे श्रद्धालुओं को उठाना पड़ रहा है। हालात ये है कि श्रद्धालु मोबाइल की रोशनी में बाबा के दर्शन करने को मजबूर हैं। हैरानी की बात है सोलर प्लांट, जनरेटर और इन्वर्टर की सुविधाएं होने के बावजूद बिजली गुल होते ही मंदिर परिसर में अंधेरा छा जाता है।
ऐसे में श्रद्धालु मोबाइल की रोशनी में शिव के दर्शन कर रहे हैं। यहां काम कर रहे कर्मचारियों को पिछले छह महीने से वेतन नहीं मिला है। पुजारियों को मिलने वाला अंशदान भी उन्हें निर्धारित समय पर नहीं मिल रहा। सर्दियों में अलाव के लिए इस्तेमाल हुई लकड़ी का पैसा अभी तक नहीं दिया गया है। वहीं मकर संक्रांति पर घृत गुफा के लिए दिए जाने वाले घी का भुगतान भी अभी तक नहीं हुआ है। पुजारियों का कहना है कि समिति न होने से कोई जिम्मेदारी लेने वाला नहीं है। जिससे समस्याएं भी बढ़ती जा रही हैं। इसका असर यहां पहुंचने वाले श्रद्धालुओं पर पड़ रहा है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के संरक्षण सहायक नीरज नैथानी ने बताया कि पिछले डेढ़ वर्ष से मंदिर प्रबंधन समिति अस्तित्व में नहीं है। ऐसे में मंदिर परिसर में लाइट और अन्य जरूरी मरम्मत का कार्य जल्द शुरू कराया जाएगा। श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की मांग है कि जल्द से जल्द नई प्रबंधन समिति बनाई जाए ताकि जागेश्वर धाम में व्यवस्थाएं पटरी पर आ सकें।
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फोटो- 05एएलएम 21पी- जागेश्वर धाम में बिजली गुल होने के बाद पसरा अंधेरा। संवाद
फोटो- 05एएलएम 22पी- धाम में मोबाइल की रोशनी में दर्शन को कतारों में खड़े श्रद्धालु। संवाद