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देवन्य जीवों को चुनावी मुद्दा बनाएंगी महिलाएं

Wed, 02 Nov 2016 11:14 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा।
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बैठक करतीं महिलाएं। - फोटो : अमर उजाला
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 बंदर, जंगली सुअरों के आतंक से परेशान महिलाओं ने इसे चुनावी मुद्दा बनाने का निर्णय लिया है। 70 से अधिक गांवों की महिलाओं ने इसी मुद्दे पर 20 नंवबर को गांव-गांव पदयात्रा करने का भी फैसला किया। 20 नवंबर को प्रस्तावित महिला एकता परिषद की गोष्ठी में भी वन्य जीवों से खेती को हो रहे नुकसान पर बातचीत की जाएगी।
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बुधवार को महिला एकता परिषद की कार्यकारिणी की बैठक में तय किया गया कि 20 नवंबर को शीतला पुष्कर मैदान में गोष्ठी होगी। बैठक का संचालन करते हुए सचिव मधुबाला कांडपाल ने कहा कि परिषद ने बंदर, सुअरों से परेशान महिला किसानों को न्याय दिलाने के लिए कई बार धरने, प्रदर्शन और बड़े आंदोलन किए गए, लेकिन सरकारों ने महिलाओं की इस पीड़ा को गंभीरता से नहीं लिया। अब बंदर, सुअरों के मुद्दे को राजनीतिक मुद्दा बनाया जाएगा। 20 नवंबर को प्रस्तावित गोष्ठी में इस मामले पर विस्तार से बातचीत की जाएगी। बैठक में तय किया गया कि गोष्ठी के बाद गांव-गांव पदयात्रा निकाली जाएगी और बंदर, जंगली सुअरों के आतंक से निजात दिलाने का आश्वासन देने वाले जनप्रतिनिधि को ही जिताने की अपील की जाएगी। परिषद के बीस वर्षों में किए गए कार्यों पर एक पत्रिका का भी विमोचन किया जाएगा।

गोष्ठी के लिए परिषद की संयोजिका अनुराधा पांडे को मुख्य अतिथि को आमंत्रित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई। परिषद की अध्यक्ष मोहनी देवी ने बैठक की अध्यक्षता की। मोहनी देवी ने बताया कि 1996 में 70 से अधिक गांवों के महिला मंगल दलों को मिलाकर महिला एकता परिषद का गठन किया गया था। गठन के बीस साल पूरे होने पर परिषद ने महिला सदस्यों से पूछा था कि इन बीस सालों की सबसे बड़ी समस्या क्या है। महिलाओं ने वन्य जीवों से खेती को हो रहे नुकसान को सबसे बड़ी समस्या बताया है। बैठक में भगवती तिवारी, हेमा नेगी, माया जोशी, मोहनी देवी, सरस्वती देवी, राधिका देवी, हेमा कांडपाल, दुर्गा देवी, कौशल्या देवी सहित अन्य कई महिलाएं मौजूद थीं।
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