उत्तराखंड के ग्रामीणों का स्वभाव भी सचमुच देवभूमि सरीखा है। सीधे साधे, शांत स्वभाव के ग्रामीणों में अतिथि देवो भव कि भावना भी कूटकूट कर भरी हुई है। योग सीखे के लिए निकटवर्ती मवड़ा गांव पहुंचे गुजराती पर्यटक ों के ग्रुप का कहना था कि जिस तरह से मवड़ा के ग्रामीणों ने उनका अतिथि सत्कार किया, इस तरह का सम्मान उन्हें कहीं नहीं मिला।
ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यटन विकास की अपार संभावनाएं हैं, सरकार की सकारात्मक सोच जहां स्थानीय युवाओं को घर पर रोजगार दे सकती है वहीं, पलायन की समस्या भी दूर कर सकती है। मवड़ा ग्राम विकास समिति (मग्रास) के संस्थापक पूर्व राजदूत चंद्रमोहन भंडारी यहां मवड़ा गांव के निवासी हैं। उन्होंने यहां मवड़ा योग केंद्र भी खोला है। जिसमें हर साल दूरदराज के क्षेत्रों के लोग आकर योग सीखते हैं।
अहमदाबाद से पहुंचे परमात्मा अग्रवाल, मनीष शाह ने कहा कि ग्रामीणों के भोलेपन के बारे में तो सुना था, लेकिन मवड़ा के ग्रामीणों ने जिस तरह से उनका सत्कार किया वह काबिले तारीफ है। पर्यटकों ने बताया कि उन्होंने सिलोर महादेव मंदिर के दर्शन किए, गगास नदी में नहाया। ग्रामीणों का अपनापन देखकर इतनी खुशी हुई कि काश वह लोग 10 दिनों के लिए आए होते, हालांकि सितंबर में उन्हें फिर यहां आना है।
गुजरात से पहुंचे परेश शाह, महेंद्र शाह, उदय देसाई, वीरेंद्र शाह ने कहा कि वह लोग पहली बार यहां आए हैं। यहां उन्हें किसी भी तरह की परेशानी नहीं हुई है, घर जैसा माहौल लगा। कश्यप शाह का कहना था कि वह लोग श्रीनगर जम्मू कश्मीर भी घूमे थे, लेकिन वहां के स्थानीय नागरिकों ने उनका कोई सम्मान नहीं किया। कहा कि पूर्व राजदूत सीएम भंडारी भी क्षेत्र के विकास की भावना सेवानिवृत्ति के बाद यहां खींच लाई, उन्हें सहयोग करना चाहिए।