एक तरफ प्रदेश सरकार ने आर्य कन्या इंटर कालेज में हुई 10 प्रवक्ताओं की नियुक्तियों में कथित अनियमितता की जांच के आदेश दिए हैं। दूसरी तरफ सरकार ने मंगलवार को जगमोहन सोनी को दोबारा अल्मोड़ा का मुख्य शिक्षाधिकारी बना दिया है, जबकि कथित विवादास्पद नियुक्तियों के इस मामले में कहीं न कहीं जगमोहन सोनी भी जांच के घेरे में हैं और उक्त प्रकरण की जांच अभी जारी है। इससे भाजपा सरकार का पारदर्शी शासन देने के दावा भी हवाई साबित हुआ है।
मालूम हो कि कांग्रेस शासन काल में करीब आठ माह पहले आर्य कन्या इंटर कालेज अल्मोड़ा में प्रवक्ताओं के 10 पदों की नियुक्ति में अनियमितताओं की शिकायत मिलने के बाद हाल ही में भाजपा सरकार ने जांच के आदेश दिए थे। शासन के आदेश पर बीते दिनों जिलाधिकारी सविन बंसल इस प्रकरण की जांच करके शासन को रिपोर्ट भेज चुके हैं। सूत्रों के मुताबिक जिलाधिकारी की रिपोर्ट में नियुक्तियों में पारदर्शिता नहीं बरते जाने की बात सामने आई है।
जिलाधिकारी की जांच रिपोर्ट शासन के पास पहुंचने के बाद तीन दिन पहले इस प्रकरण की विभागीय जांच भी शुरू हो चुकी है। तीन दिन पहले अपर शिक्षा निदेशक सुषमा सिंह ने अन्य अधिकारियों के साथ अल्मोड़ा आकर संबंधित दस्तावेज भी कब्जे में ले लिए थे।
दिलचस्प तथ्य यह है कि यह नियुक्तियां पूर्व में प्रभारी सीईओ रहे जगमोहन सोनी के कार्यकाल में हुई हैं। इस लिहाज से देखा जाए तो इस प्रकरण के निपटने तक जगमोहन सोनी भी कहीं न कहीं जांच के घेरे में हैं। जांच निपटने से पहले सोनी को दोबारा अल्मोड़ा का सीईओ बनाने पर सवाल उठ रहे हैं। यह माना जा रहा है कि इस निर्णय से आर्य कन्या इंटर कालेज के नियुक्ति प्रकरण की जांच भी प्रभावित हो सकती है।