राजकीय प्रधानाचार्य परिषद की यहां हुई बैठक में शासन द्वारा हाईस्कूल के प्रधानाध्यापकों को इंटर कालेजों में प्रभारी प्रधानाचार्य के बजाय स्थायी प्रधानाचार्य पदों पर पदोन्नति देने की मांग की गई। वक्ताओं ने प्रभारी प्रधानाचार्य पर पदोन्नति देने के प्रस्ताव का विरोध किया।
यह भी तय हुआ कि पदोन्नति और अन्य मुद्दों को लेकर प्रांतीय कार्यकारिणी द्वारा 11 जनवरी को निदेशालय में प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन में बढ़चढ़कर भागीदारी की जाएगी। उन्होंने मांगें पूरी नहीं होने पर आगामी बोर्ड परीक्षाओं के बहिष्कार की भी धमकी दी है।
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि जिन प्रधानाध्यापकों का दो साल का कार्यकाल पूरा हो गया है उन्हें इंटर कालेजों में स्थाई प्रधानाचार्य पदों पर पदोन्नति दी जानी चाहिए। प्रभारी प्रधानाचार्य बनाने के प्रस्ताव का विरोध किया जाएगा। उन्होंने कहा कि 32 प्रधानाध्यापक पदोन्नति से वंचित रह गए हैं उन्हें शीघ्र पदोन्नत किया जाना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व में कई वरिष्ठ प्रधानाध्यापकों को कार्यभार ग्रहण करने की तिथि को आधार मानकर पदोन्नति से वंचित कर दिया गया। उन्होंने पदोन्नति में वरिष्ठता को दरकिनार करने का आरोप लगाया। उन्होंने प्रधानाध्यापक पदों से प्रधानाचार्य पद पर पदोन्नति में समय सीमा को शिथिल करके दो साल करने की मांग की।
वक्ताओं ने डायट, एससीईआरटी, सीमेट आदि संस्थानों में प्रधानाचार्यों की पदोन्नति करने और प्रशासनिक पदों पर 50 प्रतिशत कोटा निर्धारित करने की मांग की। बैठक में चेतावनी दी गई कि अगर विभाग ने परिषद की मांगें नहीं मानी तो आगामी बोर्ड परीक्षाओं का बहिष्कार किया जाएगा। जरूरी होने पर भूख हड़ताल जैसी कार्रवाई भी की जाएगी।
बैठक में प्रधानाचार्य परिषद के अध्यक्ष दिनेश रावत, मंत्री मदन मोहन वर्मा, मदन सिंह मेर, जीवन चंद्र कांडपाल, महेश तिवारी, पीएन सिंह, गोधन सिंह बिष्ट, गुमान सिंह, सुरेश पाठक, मनोहर जोशी, आनंद सिंह बिष्ट, श्रवण कुमार पाठक सहित कई प्रधानाचार्यों ने हिस्सा लिया।
दीप जोशी