धौलछीना। पीएचसी धौलछीना में कोरोना पॉजिटिव गर्भवती महिला की तबियत बिगड़ने लगी। उसे हायर सेंटर रेफर करने का समय नहीं बचा। इस पर यहां के डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मियों ने पीपीई किट पहनकर प्रसव कराया। नवजात की कोरोना जांच रिपोर्ट निगेटिव आने पर मां ने राहत की सांस ली और उसके खुशी से आंसू छलक गए।
विकासखंड के भैंसिया छाना के बकरेटी(कनारीछीना) गांव की सरिता देवी पत्नी राजेंद्र सिंह को शुक्रवार सुबह से तेज बुखार के साथ प्रसव पीड़ा शुरू हुई। परिजनों ने उसे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र धौलछीना पहुंचाया। डॉ संजीव शुक्ला ने महिला का स्वास्थ्य परीक्षण किया तो महिला काफी तेज बुखार में तप रही थी। ड्यूटी पर लैब टेक्नीशियन ने महिला की कोरोना जांच की। रैपिड टेस्ट में महिला कोरोना पॉजिटिव मिली। जिसके बाद परिजन और स्वास्थ्यकर्मी काफी घबरा गए। इसी बीच महिला की प्रसव प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच चुकी थी। डॉ शुक्ला ने बताया कि इन परिस्थितियों में महिला को हायर सेंटर रेफर करने का जोखिम नहीं ले सकते थे। तब आनन-फानन में डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मियों ने पीपीई किट पहन कर प्रसव कराने का निर्णय लिया। इसके बाद डॉ. शुक्ला, नेहा रावत, स्टाफ नर्स राधा मेहरा और एएनएम कमला सुपियाल ने सुरक्षित प्रसव कराया। प्रसव के बाद महिला ने एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया। डॉक्टर ने बताया कि बच्चे की कोरोना रिपोर्ट नेगेटिव है। महिला का इलाज चल रहा है। बताया बच्चे को 10 दिन तक मां से अलग रखा जाएगा और मां संक्रमित होने के कारण मां का दूध न देकर परिवार के अन्य महिला या फिर लेक्टोजन का दूध दिया जाएगा।
प्रसव कराते समय हम स्वयं संक्रमित हो जाएं, इसका हमें डर नहीं था। लेकिन इस विषम परिस्थिति में किसी की जान बचाना बहुत बड़ा धर्म है। प्रसूता के पास इतना समय नहीं था कि वह यहां से 30 किलोमीटर दूर अल्मोड़ा पहुंच सके। - डॉ संजीव शुक्ला, चिकित्सा प्रभारी