अल्मोड़ा। गोविंद बल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान कोसी कटारमल में बुधवार को हिमालयी चारागाहों और मानव जीव संघर्ष पर व्याख्यान का आयोजन किया गया। डॉ. जीएस रावत ने पर्यावरण अनुकूल पर्यटन के लिए एसओपी बनाने और सामुदायिक संस्थाओं को सशक्त करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने हिमालयी क्षेत्रों में चारागाहों और मानव जीव संघर्ष की बारीकियों से अवगत कराया। कहा कि भारतीय हिमालयी क्षेत्र के लद्दाख, चांगथांग, लाहौल-स्पीति, किन्नौर और उत्तरी सिक्किम के रेंजेलैंड की स्थिति के बारे में बताया।
डॉ. जीएस रावत ने कहा कि विदेशी आक्रामक प्रजातियों ने हिमालयी क्षेत्रों में पाई जाने वाली महत्वपूर्ण और दुर्लभ प्रजातियों को समाप्त या समाप्ति की कगार पर कर दिया है। इसके समाधान के लिए हिमालयी क्षेत्र में रहने वाले सभी लोगों को एकजुट होकर आगे आने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि हिमालय के बिना हमारा अस्तित्व नहीं है इसलिए हिमालय से जुड़े सभी हितधारकों को नीतिगत समाधान कर इन प्रजातियों के प्रबंधन की दिशा में अपना ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है।