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कोसी को बचाने के लिए वृहद अभियान चलाने का फैसला

Thu, 14 Dec 2017 10:20 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो अल्मोड़ा।
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नए साल में कोसी को बचाने के संकल्प के साथ ‘संरक्षित कोसी-सुरक्षित जीवन’ का नारा देकर व्यापक अभियान चलाया जाएगा। कोसी जल संग्रहण क्षेत्र में चिन्हित किए गए 14 स्थानों पर चेक डैम निर्माण, पौधरोपण सहित जल संवर्द्धन के अन्य कार्य किए जाएंगे। यह कार्यक्रम कोसी पर लंबे समय से अध्ययन कर रहे भूगोल विभाग के प्रो.जेएस रावत के सलाह से किए जाएंगे।
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जिलाधिकारी ईवा आशीष ने अपने कार्यालय में पत्रकारों से वार्ता करते हुए बताया कि कोसी नदी का जल स्तर लगातार कम हो रहा है। इसे देखते हुए एक जनवरी से 15 जनवरी तक स्वयंसेवी संस्थाओं और अन्य लोगों की सहायता से प्रो.जेएस रावत द्वारा चिन्हित किए गए स्थलों पर पौधरोपण के साथ ही चाल, खाल, खंती आदि बनाए जाएंगे। उन्होंने बताया कि शुरू में स्याहीदेवी, ल्वेशाल, सिमतोला और धार पानी धार में पानी को संरक्षित करने का अभियान चलाने के साथ ही अन्य 11 स्थानो में अभियान को गति प्रदान की जाएगी।

उन्होंने बताया कि 11 जनवरी को एक वृहद कार्यशाला भी आयोजित की जाएगी। मुख्य विकास अधिकारी इस कार्यशाला के संयोजक बनाए गए हैं। इसके अलावा कोसी में काम करने वाले विभिन्न विभागों के अधिकारी भी इसमें शामिल होंगे। अधिकारियों को कोसी क्षेत्र में किए जाने वाले कार्यों के बारे प्रशिक्षण दिया जाएगा। 12
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जनवरी को स्वयंसेवी संस्थाओं, क्षेत्र के युवक और युवती मंगल दलों और स्थानीय लोगों को भी प्रशिक्षण दिया जाएगा।

डीएम ने बताया कि कोसी नदी हवालबाग और सोमेश्वर ब्लॉक के इलाके से निकलकर गुजरती है। इसे देखते हुए जागरूकता के तहत दोनों विकासखंडों के स्कूली बच्चों की निबंध और पेंटिंग प्रतियोगिता भी कराई जाएगी। प्रथम और द्वितीय स्थान पर आने वाले बच्चों को दो हजार और एक-एक हजार रुपये के पुरस्कार दिए जाएंगे। जिलाधिकारी ने बताया कि कोसी नदी में जल संवर्द्धन का कार्यक्रम काफी लंबा चलेगा और उम्मीद है कि आने वाले कुछ सालों में इसके परिणाम देखने को मिलेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि कोसी सिमतोला में स्थानीय स्तर पर होने वाले पौधों की मदर नर्सरी भी विकसित की जाएगी और नर्सरी में विकसित पौधे कोसी जल संग्रहण क्षेत्र में लगाए जाएंगे। कोसी में चलने वाले इस कार्यक्रम में जीबी पंत पर्यावरण विकास संस्थान और विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों का भी सहयोग लिया जा रहा है।
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