रानीखेत (अल्मोड़ा)। राजकीय अस्पताल में इलाज कराने के बाद घर लौटे चार वर्षीय बालक की अचानक मौत हो गई। इस पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अस्पताल परिसर में हंगामा किया। उन्होंने अस्पताल प्रशासन के खिलाफ कड़ा आक्रोश जताया। सूचना मिलने के बाद विधायक करन माहरा और ब्लॉक प्रमुख हीरा रावत भी अस्पताल पहुंच गए।
बता दें कि बुखार पीड़ित बच्चे को परिजनों ने अस्पताल में इमरजेंसी वार्ड में दिखाया था। डाक्टर ने दवा लिखी और बच्चे को घर भेज दिया। शनिवार की सुबह बच्चे का फिर स्वास्थ्य बिगड़ा, अस्पताल लाने पर डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। सीएमएस ने इलाज करने वाले डॉक्टर से मामले में स्पष्टीकरण मांगा है। बताया जा रहा है कि बजीना गांव निवासी त्रिलोक सिंह का चार वर्षीय बालक हर्षित शुक्रवार को बुखार से पीड़ित था। देर शाम परिजन उसे राजकीय अस्पताल ले आए।
डॉ. नरेश गुलवानी ने बच्चे का स्वास्थ्य जांचा। कहा कि बुखार है और उसे पैरासिटामाल सिरप दे दी। परिजन बच्चे को घर ले गए। शनिवार की सुबह हर्षित का स्वास्थ्य फिर बिगड़ गया। परिजन अस्पताल लाए, लेकिन डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। बुखार से बच्चे की मौत परिजनों के गले नहीं उतरी, उन्होंने इसे डाक्टरों की घोर लापरवाही करार दिया। सूचना के बाद विधायक करन माहरा और ब्लॉक प्रमुख हीरा रावत सहित कई कांग्रेसी अस्पताल पहुंच गए।
वहां हंगामा किया और तोहमत मढ़ी कि अस्पताल प्रशासन की लापरवाही से बच्चे की मौत हुई है। विधायक माहरा ने सीएमएस डॉ. केके पांडे के साथ बैठक की और मामले की जांच की मांग उठाई। सीएमएस ने कहा कि इस मामले की जांच होगी, साथ ही जिस डॉक्टर ने इलाज किया था उनसे स्पष्टीकरण भी मांगा गया है। इसके बाद मामला शांत हुआ। इस दौरान हेमंत मेहरा, सोनू सिद्दीकी, विनीत चौरसिया, गुड्डू खान, तहसीलदार विवेक राजौरी, कांग्रेस नगर अध्यक्ष उमेश भट्ट, हरीश मनराल, दीपक पंत आदि थे।
बच्चे को पैरासिटामाल की दवा दी गई थी। शनिवार की सुबह अस्पताल पहुंचने से पहले उसकी मौत हो चुकी थी। हो सकता है कि बच्चे की श्वास नली या फेफड़े में तरल या ठोस खाना अटका हो जिस कारण दम घुटने से मौत हुई हो। जरूरत पड़ी तो मामले की जांच होगी। -डॉ. केके पांडे, सीएमएस, राजकीय अस्पताल रानीखेत।