पहले समाज कल्याण विभाग के शिविरों में डॉक्टरों की लगातार ड्यूटी के चलते रोगियों की फजीहत हुई और अब सरकार ने डॉक्टरों के लिए रोटेशन प्रणाली लागू कर दी है।
इस प्रणाली के तहत एक एक महीने के लिए डॉक्टरों को अभाव से जूझ रहे बागेश्वर अस्पताल भेजा जा रहा है। जिस कारण रोगियों को फिर से परेशानी उठानी पड़ेगी। हड्डी रोग विशेषज्ञों को ही रोटेशन प्रणाली से गुजरना पड़ रहा है।
रानीखेत के राजकीय चिकित्सालय में गढ़वाल से भी रोगी आते हैं। भारी भरकम खर्च कर अस्पताल पहुंचने वाले रोगियों को विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं मिलते, जिसके चलते उन्हें भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
एक माह पहले तक समाज कल्याण विभाग के शिविरों में लगातार डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई जा रही थी, अब रोटेशन प्रणाली के तहत डॉक्टरों को एक एक महीने के लिए बागेश्वर अस्पताल भेजा जा रहा है।
जनवरी में वरिष्ठ हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. एलएम चंद्रा को वहां भेजा गया था, अब महानिदेशक स्वास्थ्य की तरफ से दूसरे हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. संजय नेगी को इस प्रणाली के तहत बागेश्वर भेजने के फरमान जारी हो चुके हैं। उन्हें 16 फरवरी को वहां तैनाती लेनी है।
अस्पताल में डॉक्टरों के लिए कब बनेंगे भवन
राजकीय अस्पताल में डॉक्टरों के लिए भवनों की समस्या अभी तक दूर नहीं हो सकी है। अस्पताल में वर्तमान में 16 डॉक्टर तैनात हैं, जिनके लिए सिर्फ चार स्थायी आवास हैं, सात डॉक्टर स्थायी आवासों में रह रहे हैं, जबकि चार डॉक्टरों को ट्रामा सेंटर के खाली भवन में रहने दिया जा रहा है।
बाकी के चार डाक्टर दूर दराज किराए के भवनों में रहने को मजबूर हैं। इसका सीधा असर आपातकालीन सेवाओं पर पड़ रहा है। परिसर में आवासीय भवन निर्माण की पर्याप्त जगह होने के बावजूद स्वास्थ्य विभाग उदासीन बना हुआ है। महत्वपूर्ण दायित्व वाले डॉक्टरों के दूर किराए पर रहने का खामियाजा जहां 90 से 100 किमी की दूरी से आने वाले गंभीर रोगियों को भुगतना पड़ता है।
रोटेशन प्रणाली के तहत इस बार एक माह के लिए हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. संजय नेगी को बागेश्वर जाना है। इसके लिए महानिदेशक स्वास्थ्य की तरफ से आदेश हो चुके हैं। यहां लगभग 10 आवासीय भवनों की और जरूरत है, कई बार शासन को प्रस्ताव भेजे गए हैं। - डॉ. डीएस नेई, अधीक्षक, राजकीय अस्पताल रानीखेत।