सदानीरा गगास नदी को पानी देने वाले अधिकांश गधेरे (नाले) भी रोखड़ में तब्दील हो चुके हैं। संरक्षण नहीं होने के कारण नाले वर्षा पर निर्भर होकर रह गए हैं। इससे सब्जी उत्पादन के लिए मशहूर गगास घाटी के किसानों को सिंचाई के लिए भी परेशानी हो रही है। लोगों का मानना है कि चाल खाल बनाकर वर्षा के पानी को संग्रहित करें तो इससे नमी होगी और स्रोत भी रिचार्ज होंगे।
गगास नदी रानीखेत और द्वाराहाट क्षेत्र के हजारों ग्रामीणों की प्यास बुझाती है। किसान भी सिंचाई के लिए भी इसी नदी पर निर्भर हैं। वनों का अनियंत्रित दोहन, बारिश की कमी, सहायक नदियों के स्रोत सूखने के कारण गगास नदी का जल स्तर निरंतर गिर रहा है, जिसके चलते गर्मियों में पेयजल संकट खड़ा हो जाता है। गगास नदी में सैकड़ों छोटे गधेरे गिरते हैं, लेकिन अधिकांश नाले भी रोखड़ में तब्दील हो गए हैं। नालों का रिचार्ज करने के लिए भूमि संरक्षण वन प्रभाग जायका योजना के तहत मुझोली, दुगौड़ा, विंता, चौकुनी, कनेरगांव, पागसा सहित 11 नालों में चेक डैम, पौधारोपण, चाल खाल बनाने की बात कह रहा है। गगास रेंज के रेंजर रमेश चंद्र जोशी का कहना है कि इन नालों में कार्य चल रहा है।
नदियों का जल स्तर निरंतर गिर रहा है। नदी का रास्ता न रोकें, बारिश के पानी को सहेजें। नदी को जीवन देने के लिए सभी को संरक्षक के रूप में आगे आना होगा।
-विमल सती, वरिष्ठ पत्रकार।
-ग्रामीण घरों और खेतों के आसपास चाल खालों का निर्माण करे, इससे बारिश के पानी का संग्रहण होगा और नमी बनी रहेगी। नमी के चलते विलुप्ती की कगार पर खड़े भू जल स्रोतों को भी नया जीवन मिलेगा। वनों को आग से हर हाल में बचाना होगा।
-आनंद अग्रवाल, सामाजिक कार्यकर्ता, रानीखेत।
-गगास नदी के संरक्षण को लेकर सरकारों की तरफ से कोई प्रयास नहीं हो रहे हैं। नदियों को बचाने के लिए संगठनों द्वारा पूर्व में भी यात्राएं निकाली गई, लेकिन परिणाम नहीं निकले हैं। वृक्षों का अनियंत्रित दोहन रोकना होगा, बांज के जंगल विकसित करने चाहिए।
-विशन दत्त जोशी, कुमाऊंनी कवि, रानीखेत।