अल्मोड़ा। राज्य में फार्मेसी संवर्ग के पुनर्गठन की प्रक्रिया के तहत स्वास्थ्य उप केंद्रों में पूर्व से स्वीकृत 536 पदों को खत्म करने के बाद जिलों की चिकित्सा इकाइयों में पदों का पुनर्वितरण कर पूरे संवर्ग के ढांचे को मात्र 963 पदों तक सीमित कर दिया है। जमीनी स्तर पर पदों के इस खात्मे से पहाड़ के दूरदराज के क्षेत्रों में मरीजों को मिलने वाली प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाएं बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं।
स्वास्थ्य उप केंद्र ग्रामीण इलाकों में प्राथमिक चिकित्सा और जीवन रक्षक दवाओं के मुख्य केंद्र होते हैं। फार्मेसी अधिकारी न होने से मरीजों को मामूली सर्दी-खांसी, बुखार या प्राथमिक उपचार की दवाओं के लिए भी मीलों दूर बड़े अस्पतालों या जिला चिकित्सालयों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। पर्वतीय और ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क दुर्घटनाओं, जंगली जानवरों के हमलों या अचानक तबीयत बिगड़ने पर उप केंद्रों में तैनात फार्मेसी अधिकारी तुरंत प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराते थे। पद समाप्त होने से अब मरीजों को समय पर आपातकालीन प्राथमिक सहायता मिलना मुश्किल हो रहा है जिससे जान का जोखिम बढ़ सकता है। गांवों के सरकारी केंद्रों में दवाएं मुफ्त मिलती हैं। इन पदों के खत्म होने से स्थानीय मरीजों को मजबूरन निजी मेडिकल स्टोरों से महंगी दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं जिससे गरीब परिवारों पर आर्थिक संकट बढ़ रहा है।
प्रदेश की विषम भौगोलिक स्थितियों के दृष्टिगत प्रदेश सरकार को आईपीएचएस मानक में केंद्र से छूट अनुमन्य कराते हुए स्वास्थ्य उप केंद्रों में 391 पदों को पुनर्जीवित करना चाहिए। इससे दुर्गम, अति दुर्गम क्षेत्रों में गरीब जनता को स्वास्थ्य लाभ मिलेगा और दवाओं के दुरुपयोग और दुष्प्रभाव से बचा जा सकेगा। -डीके जोशी, जिलाध्यक्ष डिप्लोमा फार्मासिस्ट एसोसिएशन अल्मोड़ा
दुर्गम क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ बने फार्मेसी अधिकारी
डॉक्टरों के अभाव में पीएचसी कंधार और देवनाई में संजीवनी बने कर्मी, जिले में 51% पद रिक्त
बागेश्वर। स्वास्थ्यवर्धक भविष्य के लिए फार्मेसी अधिकारियों को सशक्त बनाना थीम के साथ 25 सितंबर को विश्व फार्मेसी दिवस मनाया जा रहा है। जिले में यह दिवस विशेष मायने रखता है जहां विषम परिस्थितियों और डॉक्टरों की भारी कमी के बावजूद प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में तैनात फार्मेसी अधिकारी आम जनता के लिए मुख्य सहारा बने हुए हैं।
जिले के कंधार, देवनाई, उधमस्थल और लाहुर जैसे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में वर्तमान में कोई चिकित्सक तैनात नहीं है। ऐसे में इन दुर्गम क्षेत्रों में प्राथमिक उपचार, ओपीडी सेवाएं, दवा वितरण और स्वास्थ्य परामर्श की पूरी जिम्मेदारी फार्मेसी अधिकारी ही संभाल रहे हैं। इसके बावजूद जिले में फार्मेसी संवर्ग का ढांचा भारी अभाव से जूझ रहा है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में स्वीकृत 84 पदों के सापेक्ष केवल 41 फार्मेसी अधिकारी ही कार्यरत हैं जबकि 43 पद रिक्त चल रहे हैं। इसमें प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में 12 और उप-स्वास्थ्य केंद्रों में 24 पद खाली हैं। कपकोट और कांडा सीएचसी और सीएमओ कार्यालय के टीबी क्लीनिक में भी स्वीकृत पद खाली पड़े हैं।
फार्मेसी अधिकारी स्वास्थ्य विभाग के अत्यंत महत्वपूर्ण अंग हैं। जिले के दूरस्थ और विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले क्षेत्रों में डॉक्टरों की अनुपस्थिति के बावजूद फार्मेसी अधिकारी जिस मुस्तैदी से प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं और दवा प्रबंधन संभाल रहे हैं, वह सराहनीय है। स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने व रिक्त चल रहे पदों को भरने के लिए शासन स्तर पर निरंतर पत्राचार और आवश्यक प्रयास किए जा रहे हैं। -डॉ. कुमार आदित्य तिवारी, सीएमओ, बागेश्वर