नेशनल प्लान ऑफ एक्शन के तहत जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में जीजीआईसी एनटीडी अल्मोड़ा में आयोजित विधिक साक्षरता शिविर में प्राधिकरण के सचिव डा. शेष चंद्र ने कहा कि बालकों से कठोरतम श्रम करवाया जाना एक अपराध है। 14 वर्ष से कम आयु के किसी बालक से दुकान, फैक्ट्री या किसी भी सार्वजनिक स्थलों में काम नहीं करवाया जा सकता है। इसमें कड़े दंड का प्रावधान है।
उन्होंने बताया कि विवाह के लिए लड़के और लड़की की आयु क्रमश: 21 तथा 18 वर्ष होनी चाहिए। इससे कम उम्र के लड़के-लड़की का विवाह किया जाना कानूनन अपराध है। इस प्रकार का कृत्य माता पिता, संरक्षक अथवा पंडित आदि द्वारा किया जाता है तो उन्हें कड़ी सजा का प्रावधान है। महिला बाल समिति की हेमलता भट्ट ने ज्यूवेनाइल जस्टिस बोर्ड की कार्यप्रणाली और उद्देश्यों और पॉक्सो अधिनियम के बारे में बताया। इस मौके पर छात्राओं को सरल कानूनी ज्ञान माला पुस्तकों का वितरण किया गया। शिविर में मोहन बिष्ट, विनीता आर्या, सुनीता रानी, लक्षिता बिष्ट आदि मौजूद थे।
इससे पूर्व प्राधिकरण की ओर से जीआईसी लोधिया में में हुए शिविर अध्यक्षता करते हुए प्राधिकरण के सचिव डा. शेष चंद्र ने भ्रूण हत्या को एक गंभीर अपराध बताते लिंगानुपात की बिगड़ती स्थिति पर चिंता जताई। कॉलेज के प्रवक्ता कमलकांत जोशी, ज्यूवेनाइल जस्टिस बोर्ड की सदस्य हेमलता भट्ट, कुंदन रावत, गोपाल बिष्ट, डा. जानकी लोहनी, बीएस बिष्ट, एमपी आर्या, सुरेंद्र गुणवंत, राजेंद्र कनवाल, कमलेश्वरी तिवारी आदि उपस्थित थे।