विशेष सत्र न्यायाधीश डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार शर्मा ने चरस रखने के आरोप में पकड़े गए व्यक्ति को बाइज्जत बरी तक कर दिया है। इस मामले में फर्जी केस बनाने का दोषी मानते हुए लमगड़ा थाने के तत्कालीन थानाध्यक्ष एसआई राजेंद्र प्रसाद समेत आठ पुलिस कर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश न्यायालय ने दिए हैं, साथ ही नोटिस देकर स्पष्टीकरण लेने को भी कहा है।
30 जुलाई 2017 को लमगड़ा थानाध्यक्ष एसआई राजेंद्र प्रसाद के नेतृत्व में पुलिस ने मोरनौला तिराहे से दिनेश चंद्र मेलकानी को 400 ग्राम चरस के साथ गिरफ्तार दिखाया था। मोरनौला (नैनीताल) में उसके भाई इंद्र कुमार मेलकानी की दुकान है। क्षेत्र के लोगों का आरोप था कि पुलिस ने शाम को 4:25 बजे दुकान से दिनेश चंद्र मेलकानी को उठा लिया, लेकिन वह घर नहीं लौटा।
21 जुलाई को क्षेत्र के ग्राम प्रधान, सरपंच समेत ग्रामीणों ने बैठक कर पुलिस की इस कार्रवाई का विरोध किया और डीएम, एसएसपी को ज्ञापन दिया। भीमताल के विधायक राम सिंह कैड़ा ने दिनेश चंद्र मेलकानी को निर्दोष बताते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर डीएम और एसएसपी को पत्र भी लिखा था।
यह मामला विशेष सत्र न्यायाधीश की अदालत में चला। अभियोजन की ओर से मामले में आठ गवाह पेश किए गए, जो सभी पुलिस कर्मी ही थे, जबकि बचाव पक्ष के अधिवक्ता चामू सिंह गस्याल ने आरोपी के भाई और गांव के पूर्व प्रधान को गवाह के रूप में पेश किया। गवाहों के बयान और पत्रावली का अध्ययन कर न्यायालय ने दिनेश चंद्र मेलकानी को निर्दोष माना।
अधिवक्ता चामू सिंह गस्याल ने बताया कि न्यायालय ने पाया कि पुलिस कर्मियों ने दिनेश मेलकानी के खिलाफ फर्जी केस बनाया था। न्यायालय ने एसआई समेत आठ पुलिस कर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। आदेश की प्रति डीजीपी देहरादून और एसएसपी को भी भेजी है।