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जख्मों ने ली नारायण राम की जान, किसने दिए स्पष्ट नहीं

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अल्मोड़ा। भैंसियाछाना ब्लॉक के शील गांव में बीती रविवार रात मारे गए (54) नारायण राम की मौत के कारणों पर संशय बना हुआ है। पोस्टमार्टम में भी मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो सका है कि नारायण राम को किसी जानवर ने मारा है या नहीं। उधर, शीलगांव में लगाए गए दो पिंजरों में तेंदुआ अब तक नहीं फंसा है।
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नारायण राम का शव सोमवार सुबह शीलगांव से करीब तीन सौ मीटर दूर गधेरे के पास झाड़ियों में बरामद हुआ था। उसके सिर और गले में पंजे के निशान बताए जा रहे थे। लोग रविवार रात में तेंदुए द्वारा नारायण राम को घर के भीतर से उठा ले जाने की आशंका जता रहे थे। लेकिन, तेंदुए ने शव के किसी भी हिस्से को नहीं खाया था। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार मृतक नारायण राम की एक चप्पल घर के पास और दूसरी चप्पल करीब 50 मीटर दूर मिली थी।

इसके चलते नारायण राम की मौत के कारण पर संशय व्याप्त है। इधर, पोस्टमार्टम के बाद भी नारायण राम के मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो सका है। पोस्टमार्टम करने वाले बेस अस्पताल के सर्जन डॉ. आरएस भौत ने बताया कि मृतक के चेहरे के अलावा पीछे गर्दन के पास और पेट में गहरे घाव थे।
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अत्यधिक रक्तस्त्रत्तव से नारायण राम की मौत हुई है। उन्होंने बताया कि नारायण राम के चेहरे, गर्दन के पास और पेट पर मिले घाव किसी जानवर ने किए हैं, यह स्पष्ट नहीं है। उधर, वन विभाग ने शीलगांव में तेंदुए को पकड़ने के लिए दो स्थानों पर पिंजरा लगा रखा है, लेकिन अब तक तेंदुआ पिंजरे में कैद नहीं हो सका है। हालांकि वन कर्मी भी गांव में गश्त कर रहे हैं।
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