सरकारों की धार्मिक स्थलों को सुविधाओं से सुसज्जित करने की योजना को गति नहीं मिल पा रही है। भनोली तहसील मुख्यालय के समीप स्थित प्रसिद्ध झांकरसैम मंदिर आज भी उपेक्षित है। मंदिर परिसर में ईको हटों और बहुउद्देश्यीय सभागार के निर्माण के लिए 3.91 करोड़ स्वीकृत हैं, लेकिन धीमी गति से चल रहे कार्य के चलते लंबा समय बीतने के बाद भी यह कार्य पूरा नहीं हो पाया है। यहां रैन बसेरा बनाने के लिए शासन को भेजे प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिल सकी है।
सातवीं से 12 वीं सदी के मध्य बने जागेश्वर मंदिर समूह से करीब दो किमी पैदल दूरी पर झांकरसैम मंदिर स्थित है। मान्यता है कि जागेश्वर मंदिर समूहों की स्थापना के समय ही झांकरसैम मंदिर का भी निर्माण हुआ। जागेश्वर धाम पहुंचने वाले भक्तजन झांकरसैम मंदिर (भगवान शंकर के स्वरूप) आते हैं। इसके अलावा माघ, सावन, बैशाख आदि महीनों में भी अल्मोड़ा, नैनीताल, पिथौरागढ़ जिले के ग्रामीण क्षेत्रों से काफी संख्या में देवडांगरों की जातुराएं यहां पहुंचती हैं। हालांकि मंदिर कमेटी ने स्वयं के प्रयासों से दो कक्षों का निर्माण किया है। श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए यह अपर्याप्त साबित हो रही हैं।
दो साल पहले ग्रामीण निर्माण विभाग ने रैन बसेरे का आगणन बनाकर शासन को भेजा था, पर इस प्रस्ताव को अब तक मंजूरी नहीं मिल पाई है। वहीं केंद्र सरकार से मंदिर परिसर से लगी भूमि में नौ ईको हट, बहुउद्देश्यीय सभागार बनाने के लिए के 3.91 करोड़ रुपए मंजूर हैं। करीब एक साल पहले यह काम शुरू हुआ था लेकिन कार्य अब तक पूरा नहीं हो सका है।
मंदिर कमेटी के अध्यक्ष देवीदत्त पांडे ने ईको हटों का निर्माण धीमी गति से होने पर नाराजगी जताई है। उन्होंने पर्यटन विभाग से जल्द काम पूरा करने की मांग की है। जिला पर्यटन विकास अधिकारी कीर्ति चंद्र आर्य का कहना है कि सरकार से 3.91 करोड़ के सापेक्ष 94.57 लाख रुपए विभाग को मिले हैं, जिसका काम प्रगति पर है। शासन को शेष धनराशि अवमुक्त करने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है।