कार्बेट लेंडस्केप में बन रहे रिजॉर्ट्स
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मौलेखाल (अल्मोड़ा)। हाईकोर्ट के आदेशों के बावजूद नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाकर ईको सेंसेटिव जोन कार्बेट नेशनल पार्क से सटे मरचूला इलाके में धड़ल्ले से रिजॉर्टों का निर्माण किया जा रहा है। पिछले माह सल्ट के एसडीएम ने क्षेत्र में निरीक्षण के दौरान दो रिजॉर्टों का निर्माण कार्य रुकवाया था। प्रशासन को ठेंगा दिखाते हुए रिजॉर्ट स्वामियों ने अब फिर से निर्माण कार्य शुरू करवा दिया है। ईको सेंसेटिव जोन काठ की नाव में भी एक रिजॉर्ट का निर्माण कार्य चल रहा है।
हाईकोर्ट के आदेशों के बावजूद ईको सेंसेटिव जोन कार्बेट टाइगर रिजर्व (सीटीआर) की सीमा से सटे मरचूला इलाके में नियमों को ताक में रखकर धड़ल्ले से रिजॉर्ट बनाए जा रहे हैं। जनवरी में सल्ट के एसडीएम गोपाल राम बिनवाल ने मरचूला क्षेत्र में निरीक्षण किया। तब उन्होंने ईको सेंसेटिव जोन मरचूला क्षेत्र में नियमों की धज्जियां उड़ाकर बनाए जा रहे दो रिजॉर्टों (रिवरक्रिक रिजॉर्ट, लीला रिजॉर्ट) का काम रुकवाया दिया था। एसडीएम ने हाईकोर्ट के आदेशों का हवाला देते हुए रिजॉर्ट स्वामियों को निर्माण कार्य बंद रखने के निर्देश दिए थे।
इधर हाईकोर्ट के आदेशों और एसडीएम के निर्देशों को ठेंगा दिखाते हुए रिजॉर्ट स्वामियों ने फिर से रिजॉर्ट का निर्माण कार्य शुरू कर दिया है। इन दिनों मरचूला में दो रिजॉर्टोें का निर्माण कार्य धड़ल्ले से किया जा रहा है। ईको सेंसेटिव जोन काठ की नाव में भी एक रिजॉर्ट का निर्माण किया जा रहा है। रिजॉर्ट स्वामी के बारे में फिलहाल कोई पता नहीं चल पा रहा है। क्षेत्र के लोगों ने ईको सेंसेटिव जोन में रिजॉर्ट बनाए जाने का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि ईको सेंसेटिव जोन में रिजॉर्ट बनाने से पर्यावरण को भारी खतरा होगा। हाईकोर्ट ने ईको सेंसेटिव जोन में दस किमी दायरे में व्यावसायिक भवनों के निर्माण में रोक लगाई है। इसके बावजूद धड़ल्ले से व्यावसायिक भवन बनाए जा रहे हैं।