फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नियमितीकरण की मांग को लेकर जल संस्थान के संविदा श्रमिकों ने किया प्रदर्शन

विज्ञापन
विज्ञापन
अल्मोड़ा/भिकियासैंण। जल संस्थान में पिछले दो दशक से अधिक समय से कार्य कर रहे संविदा श्रमिकों ने बिष्टाकूड़ा स्थित ईई कार्यालय प्रांगण में धरना दिया। उन्होंने नियमित नियुक्त देने के अलावा विभागीय संविदा और उपनल में समायोजित करने की मांग उठाई। भिकियासैंण में संविदा श्रमिकों ने जुलूस निकालकर प्रदर्शन किया।
विज्ञापन

अल्मोड़ा में ईई कार्यालय में धरना स्थल पर हुई सभा में वक्ताओं ने कहा कि वह पिछले 20 से 25 साल से ठेकेदार के अधीन विभाग में सेवाएं दे रहे हैं। जिले में 142 श्रमिक, पंप आपरेटर और चालक तैनात हैं। उन्हें मात्र सात से आठ हजार ही वेतन मिल रहा है, जो काफी कम है। उन्होंने समान कार्य के लिए समान वेतन देने, ठेकेदार के अधीन से हटाकर नियमित नियुक्ति देने, विभागीय संविदा और उपनल के माध्यम से समायोजित करने की मांग की। बाद में मांगों को लेकर जिला प्रशासन के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा। धरने में संगठन के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह अधिकारी, सचिव देवेंद्र प्रसाद जोशी, महेंद्र सिंह मेर, संतोष बिष्ट, दीपक सिंह, हरीश सिजवाली आदि थे।
उधर संविदा श्रमिक संघ शाखा रानीखेत के बैनर तले संविदा श्रमिकों ने भिकियासैंण एकल पंपिंग योजना में एकत्रित होकर नारेबाजी की। यहां से जुलूस की शक्ल में श्रमिकों ने तहसील कार्यालय प्रांगण में प्रदर्शन किया। बाद में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी गणेश चंद्र को मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा। उन्होंने विभाग के रिक्त पदों पर वरिष्ठता के आधार पर नियमित नियुक्ति देने, श्रमिक उत्पीड़न और शोषण से बचाने के लिए विभागीय संविदा या उपनल के माध्यम से नियुक्ति देने समेत अन्य मांग उठाई। प्रदर्शन में मंडलीय महामंत्री गणेश नाथ, शाखा अध्यक्ष केवलानंद मठपाल, राजेंद्र सिंह, कमल सिंह, हंसादत्त पांडे, विरेंद्र सिंह, गंगादत्त, इंदर सिंह, खीमानंद आदि शामिल रहे। अखिल भारतीय किसान महासभा के प्रदेश अध्यक्ष आनंद सिंह नेगी और जन सुरक्षा समिति के अध्यक्ष तुला सिंह तड़ियाल ने भी श्रमिकों के प्रदर्शन में शामिल होकर अपना समर्थन दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए विभागों में ठेकेदारी प्रथा लागू कर रही है, जिससे श्रमिकों का शोषण हो रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें