अल्मोड़ा। विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (वीपीकेएएस) के नए निदेशक डा. अरुणाभ पटनायक ने कहा है कि संस्थान के वैज्ञानिकों द्वारा कृषि के क्षेत्र में किए जा रहे अनुसंधान का लाभ आम काश्तकारों तक पहुंचाने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि वीपीकेएएस द्वारा हाल के वर्षों में मक्का, धान, गेहूं आदि के कई अच्छे बीज विकसित किए गए हैं। इनका लाभ पूरे देश के काश्तकार उठा रहे हैं।
कार्यभार संभालने के बाद पहली बार पत्रकारों से मुखातिब डा. पटनायक ने कहा कि संस्थान के वैज्ञानिक कृषि के क्षेत्र में उत्पादन बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं। ताकि काश्तकारों को अधिक से अधिक लाभ मिल सके। उन्होंने बताया कि संस्थान द्वारा विकसित मक्का का बीज क्यूपीएम-9 की देश के सभी पहाड़ी इलाकों में काफी मांग है। इसके अलावा मक्का, धान, गेहूं और सब्जियों की भी कई प्रजातियां विकसित की गई हैं। उन्होंने कहा कि संस्थान द्वारा किए जा रहे शोध आदि का लाभ काश्तकारों तक पहुंचाया जाएगा। इसके लिए प्रदेश सरकार का भी अच्छा सहयोग मिल रहा है। मालूम हो कि डा.जेसी भट्ट के सेवानिवृत्त होने के बाद डा. पटनायक नए निदेशक बनाए गए हैं। वह इससे पहले आसीएआर रिसर्च इंस्टीट्यूट बड़ापानी मेघालय में प्रधान वैज्ञानिक के तौर पर कार्यरत थे।
मक्का, मटर और टमाटर की नई किस्में विकसित
वीपीकेएएस के निदेशक डा. पटनायक ने बताया कि संस्थान ने हाल ही में मक्का की दो नई प्रजातियों के अलावा मटर और टमाटर की भी एक-एक प्रजाति विकसित की है। इन सभी प्रजातियों के काफी उपयोगी होने की संभावना है। फिलहाल इन सभी प्रजातियों को पहचान मिलनी बांकी है। इसके लिए प्रक्रिया चल रही है और आगामी दिनों में इन प्रजातियों को काश्तकारों के लिए जारी कर दिया जाएगा। यह प्रजातियों में अधिक उत्पादन देने के साथ ही रोग प्रतिरोधात्मक क्षमता भी अधिक है। उन्होंने यह भी बताया कि संस्थान द्वारा विकसित किए गए मडुवा, मादिरा थ्रेसर की भी काफी मांग है। यह थ्रेसर पहाड़ी इलाकों के लिए काफी उपयोगी है। इस मौके पर संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा.जेके बिष्ट भी मौजूद थे।