नगर में कोई भी धर्मशाला नहीं होंने से राहगीरों को काफी दिक्कतें होती हैं। हरिप्रसाद टम्टा धर्मशाला निर्माण के लिए मुख्यमंत्री द्वारा एक करोड़ रुपये और पर्यटन मंत्री द्वारा 50 लाख रुपये की घोषणा करने के चार माह बाद भी धन नहीं मिला है। जिससे शहर में धर्मशाला निर्माण का काम अधर में लटक गया है।
पूर्व में नगर में मालरोड में हरि प्रसाद टम्टा और शै: भैरव मंदिर के समीप लोकनाथ पंत धर्मशालाएं थीं। यह धर्मशालाएं जीर्ण-शीर्ण होने पर पालिका परिषद ने करीब आठ साल पहले इन्हें तोड़ दिया था। शासन से पालिका परिषद को पूर्व में लोकनाथ पंत धर्मशाला के पुनर्निर्माण के लिए करीब 53 लाख और टम्टा धर्मशाला के निर्माण के लिए लगभग 36 लाख रुपये मंजूर किए।
इनके लिए क्रमश: 40 लाख और 27 लाख रुपये अवमुक्त हुए, लेकिन पूर्व के बोर्ड ने यह धनराशि दूसरे मद खर्च कर दी। जिसे यह काम अधर में लटक गया। स्थिति यह है कि राहगीरों और निराश्रितों के रुकने के लिए नगर में कहीं कोई स्थान नहीं है। उन्हें महंगे होटलों में रहना पड़ता है।
लोगों की धर्मशाला निर्माण की मांग करने के बाद गत 10 सितंबर को भारत रत्न पं. गोविंद बल्लभ पंत जयंती कार्यक्रम के दौरान खूंट में मुख्यमंत्री ने हरि प्रसाद टम्टा धर्मशाला निर्माण के लिए एक करोड़ रुपये देने की घोषणा की थी।
इसके बाद पर्यटन मंत्री दिनेश धनै ने भी इसी धर्मशाला के लिए 50 लाख रुपये और देने की घोषणा की, लेकिन मुख्यमंत्री की घोषणा के चार माह बाद भी धर्मशाला निर्माण के लिए पालिका परिषद को अब तक बजट अवमुक्त नहीं हुआ है। जिससे धर्मशाला निर्माण का काम शुरू नहीं हो पाया है।