जिस फाइल को आला अधिकारियों की प्राथमिकता में शामिल होना चाहिए था, उसका अता-पता लापता है। इससे मुख्यमंत्री की घोषणा के तीन साल बाद भी पनुवानौला में पार्किंग नहीं बनी। डीएफओ का कहना है कि उनके कार्यालय को दस्तावेज मिले ही नहीं जबकि पेयजल निर्माण निगम का दावा है कि वन भूमि हस्तांतरण से जुड़ी फाइल तीन माह पहले गायब हो गई। ऐसे में पार्किंग निर्माण की राह और उलझ गई है।
वर्ष 2023 में मुख्यमंत्री ने पनुवानौला मुख्य बाजार के समीप वन चौकी तक पार्किंग निर्माण की घोषणा की थी। इसके बाद राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई), राजस्व विभाग, जिला प्रशासन, जिला विकास प्राधिकरण, वन विभाग और पेयजल निर्माण निगम की ओर से विभिन्न स्तरों पर रिपोर्ट तैयार की गईं। इसके बावजूद निर्माण की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। अब योजना के अटकने की वजह वन भूमि हस्तांतरण से जुड़ी फाइल का गायब होना बताया जा रहा है।
पेयजल निर्माण निगम का कहना है कि फाइल दोबारा तैयार कर एक माह के भीतर वन विभाग को भेजी जाएगी। सवाल यह है कि जब योजना की घोषणा वर्ष 2023 में हुई थी और विभिन्न विभागों ने इसके लिए रिपोर्ट तैयार कर दी थी तो भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया अब तक पूरी क्यों नहीं हो सकी। फाइल गायब होने की जानकारी सामने आने के बाद यह भी सवाल उठ रहा है कि संबंधित दस्तावेज की निगरानी और पत्रावली की स्थिति की समीक्षा किस स्तर पर की गई।
विभागों की कार्यशैली पर उठ रहे सवाल
अब फाइल गायब होने और दस्तावेज नहीं मिलने के अलग-अलग दावों ने योजना की प्रगति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। व्यापार मंडल पनुवानौला के अध्यक्ष गोपाल सिंह मेहता ने दावा किया कि बहुस्तरीय पार्किंग निर्माण के लिए वन भूमि हस्तांतरण संबंधी प्रमाणपत्र जारी कर प्रभागीय वनाधिकारी सिविल सोयम अल्मोड़ा को भेजा गया था। प्रभागीय वनाधिकारी ने कार्यदायी संस्था पेयजल निर्माण निगम से प्रस्ताव मांगा था। उन्होंने दावा किया कि प्रभागीय वनाधिकारी ने पत्र जारी कर मूल प्रति भेजे जाने की पुष्टि की है। मेहता ने आरोप लगाया कि इसके बावजूद पेयजल निर्माण निगम के परियोजना प्रबंधक विभाग और जनता को गुमराह कर रहे हैं।
सड़क किनारे खड़े होते हैं वाहन
अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 309 बी पर स्थित पनुवानौला बाजार में पार्किंग की सुविधा नहीं होने से स्थानीय लोगों, व्यापारियों और यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ रही है। वाहन चालक सड़क किनारे गाड़ियां खड़ी करने के लिए मजबूर हैं जिससे बाजार में जाम की स्थिति बन जाती है। जागेश्वर धाम, वृद्ध जागेश्वर और आदि कैलाश जाने वाले पर्यटकों को भी इससे दिक्कत होती है। पर्यटन व्यवसायी देवेंद्र बिनवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री की घोषणा से जुड़ी पार्किंग न बनने से स्थानीय लोगों वे अलावा पर्यटक भी परेशान हो रहे हैं। जनहित के कार्यों से जुड़ीं फाइलों के मामले में इस तरह की स्थिति चिंताजनक है।
भूमि हस्तांतरण, पार्किंग व शौचालय निर्माण से संबंधित फाइल करीब तीन माह पहले गायब हो गई थी। फाइल दोबारा तैयार कर एक माह के भीतर वन विभाग को भेज दी जाएगी। -हरीश प्रकाश, परियोजना प्रबंधक, पेयजल निर्माण निगम, रानीखेत
पनुवानौला में पार्किंग और शौचालय निर्माण के लिए भूमि हस्तांतरण से संबंधित दस्तावेज कार्यालय को प्राप्त नहीं हुए हैं। पत्रावलियां मिलने के बाद आवश्यक प्रक्रिया अपनाई जाएगी। -प्रदीप धौलाखंडी, डीएफओ