फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जलवायु के अनुकूल पहाड़ की परंपरागत खेती

Sun, 05 Jun 2016 11:44 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा।
विज्ञापन
उत्तराखंड सेवानिधि अल्मोड़ा - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
अल्मोड़ा। लोक चेतना मंच की ओर से उत्तराखंड सेवानिधि सभागार में पारंपरिक कृषि, संरक्षण, विकास विषय पर गोष्ठी हुई। वक्ताओं ने जलवायु, पर्यावरण, स्वास्थ्य के लिए पर्वतीय क्षेत्रों में परंपरागत खेती को बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पहाड़ की परंपरागत खेती यहां की जलवायु के अनुकूल है। 
विज्ञापन


विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. अरुणव पटनायक ने कहा कि पहाड़ की परंपरागत खेती जलवायु, पर्यावरण के लिए अनुकूल है। यहां उत्पादित अनाज स्वास्थ्यवर्धक भी हैं। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण को पहाड़ की पारंपरिक फसलें अलसी, मड़वा, झुंगरा, जौ, चौलाई आदि के उत्पादन को बढ़ावा देना होगा।

पर्वतीय क्षेत्रों के लिए संस्थान ने अधिक पैदावार देने वाली प्रजातियों के उन्नतसील बीज विकसित किए हैं। राष्ट्रीय पादप अनुवांशिकी संस्थान से आए वक्ताओं ने कहा कि परंपरागत खेती के चलते पूर्व में पहाड़ के गांव काफी समृद्ध थे। यहां उगने वाले मोटे, पौष्टिक अनाज से शिशु, मातृ मृत्यु दर भी काफी कम थी।
विज्ञापन


पहाड़ की खुशहाली के लिए फिर से परंपरागत खेती को बढ़ावा देना जरूरी है। जीबी पंत हिमालय पर्यावरण संस्थान आदि विभागों से आए राजेश जोशी, डॉ. दिनेश उप्रेती, रितु सोबानी, प्रकृति, कुसुम जोशी, भुवन जोशी के अलावा पद्मश्री डॉ. ललित पांडे, अनुराधा पांडे थे।
विज्ञापन


 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें