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सफाई व्यवस्था ठेके पर क्या आई चमचमाने लगे हैं ब्रिटिशकालीन बड़े नाले

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रानीखेत (अल्मोड़ा)। ब्रिटिशकालीन छावनी को स्वच्छ और सुंदर बनाने के लिए छावनी परिषद ने नई पहल शुरू की है। नगर के बड़े नालों की सफाई की व्यवस्था अब ठेके पर दे दी है। नगर में सात बड़े नाले हैं, जो अंग्रेजों ने बनाए थे। कैंट के सफाई कर्मचारियों का अभाव होने के कारण पूर्व में अधिकतर नाले चोक रहते थे, अब यह व्यवस्था ठेके पर दे दी है। इसका असर भी दिखने लगा है।
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रानीखेत छावनी देश की 62 छावनियों में बड़ी कैंट के रूप में शुमार है। स्वच्छता सर्वेक्षण में पूर्व में इस छावनी को तीसरी रैंकिंग मिल चुकी है, लेकिन सफाई कर्मचारियों का अभाव और फंड की कमी के चलते रैंकिंग में गिरावट आने लगी थी, इधर अब फिर से स्वच्छता के क्षेत्र में नंबर वन बनाने की मुहिम शुरू कर दी गई है। पूर्व में कैंट ने सफाई व्यवस्था को ठेके पर दिया था। इसके बाद ठेकाप्रथा को समाप्त कर दिया गया था। लॉकडाउन के बाद संविदा पर रखे गए कई सफाई कर्मियों को परिषद को हटाना पड़ गया। जिसका सीधा असर सफाई व्यवस्था पर दिखने लगा। इधर, अब फिर से ठेका प्रथा की शुरुआत हो गई है। नगर के सभी बड़े नालों की सफाई का जिम्मा छावनी परिषद ने सितंबर से ठेके पर दे दिया है। ठेकेदारों ने भी नालों की सफाई का कार्य शुरू कर दिया है। सातों बड़े नाले पूर्व में गंदगी से चोक रहते थे। बदबू के चलते लोगों का जीना दूभर हो जा रहा था। व्यवस्था ठेके पर जाने से अधिकांश नाले भी अब साफ सुथरे नजर आने लगे हैं। छावनी के स्वच्छता निरीक्षक एपी सिंह ने बताया कि ठेका प्रथा एक सितंबर से शुरू हो गई है।
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