अल्मोड़ा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से एक फरवरी को पेश बजट में इनकम टैक्स के दो स्लैब को लेकर हर किसी के मन में संशय है। अमर उजाला की ओर से ‘बजट को समझिए’ विषय पर आयोजित संवाद में मौजूद किसान, कारोबारी, डॉक्टर, युवा और गृहणियों के संशय को कर सलाहकार और टैक्स बार एसोसिएशन अध्यक्ष जगत सिंह रौतेला और बैंक अधिकारी मोहन चंद्र कांडपाल ने कुछ हद तक दूर किया। उन्होंने कहा कि नौ लाख से कम आय वालों के लिए पुराना स्लैब फायदेमंद है, जबकि इससे ऊपर आय वालों के लिए नया स्लैब बेहतर रहेगा। क्योंकि उन्हें छूट नहीं लेकर भी टैक्स में फायदा मिलेगा।
रविवार को मालरोड स्थित अमर उजाला कार्यालय में संवाद कार्यक्रम में कर सलाहकार जगत सिंह रौतेला ने बताया कि कृषि क्षेत्र की ओर ज्यादा ध्यान देने की बात बजट में कही गई है। यह अच्छा कदम है और स्वास्थ्य क्षेत्र में हर जिले के अस्पताल को आयुष्मान भारत से जोड़ना भी पर्वतीय क्षेत्र के लिए बेहतरीन कदम है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इसमें काफी समय लगेगा।
बैंक अधिकारी मोहन चंद्र कांडपाल ने बताया कि महाराष्ट्र में कॉपरेटिव बैंक में ग्राहकों के पैसे डूबने के बाद अब सरकार की ओर से पांच लाख तक बीमा देने का कदम बेहद अच्छा है। इससे जनता के पैसे डूबने का खतरा कम रहेगा।
राष्ट्रीय शिक्षा आयोग बनाने और तकनीकी क्षेत्र में युवाओं को रोजगार देने की बात कही गई है। इससे फायदा यह होगा कि ग्रामीण क्षेत्र के युवा तकनीकी क्षेत्र में पारंगत हो जाएंगे और इंटर्नशिप के जरिए वह कंपनियों में अच्छा रोजगार प्राप्त कर सकते हैं या खुद का रोजगार खोल सकेंगे। कुल मिलाकर बजट बेहतर है लेकिन इन सबके लिए संसाधन जुटाना देखने वाली बात होगी। बजट को लेकर रौतेला ने सरकार की ओर से एलआईसी के शेयर बेचने और नए कर स्लैब के प्रावधान पर कहा कि इससे आम आदमी की बचत प्रभावित होगी और कर में छूट के लिए जो व्यक्ति एलआईसी में निवेश करता था उसमें भी कमी आएगी जो भविष्य में एलआईसी के लिए नुकसानदेह हो सकता है।
क्या कहते हैं लोग
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पहले पांच लाख तक की आय अर्जित करने वालों को इनकम टैक्स देना पड़ता था। अब इसकी सीमा बढ़ाकर साढ़े सात लाख कर दिया है। इससे नौकरी पेशा लोगों को को राहत मिलेगी। शिक्षा के क्षेत्र में ज्यादा ध्यान देने की जरूरत थी। - हरेंद्र सिंह बिष्ट, शिक्षक।
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में समाज के सभी वर्ग को ध्यान में रखकर घोषणाएं की हैं। खासकर स्वास्थ्य के क्षेत्र में बजट में की गई घोषणाएं सराहनीय है। कुल मिलाकर बजट बेहतर रहा है। - मोती लाल वर्मा, सांसद प्रतिनिधि। फोटो-
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बजट में ग्रामीण इलाकों के लिए कुछ नहीं है। पलायन से गांव खाली हो रहे हैं लेकिन बजट में इसके समाधान के लिए कुछ नहीं किया गया। जंगली जानवरों के आतंक रोकने के लिए भी कोई योजना घोषित नहीं की गई। - गणेश दत्त भट्ट, व्यवसायी।
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किसान सम्मान निधि योजना का लाभ किसानों के लिए लाभकारी है। बंजर भूमि पर सौर ऊर्जा प्लांट लगाने की व्यवस्था करने से ग्रामीण ऊर्जादाता बनेंगे। जल विकास नीति के लिए धनावंटन से पेयजल के साथ ही सिंचाई क्षेत्र में लाभ मिलेगा। - आनंद सिंह कनवाल, काश्तकार।
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स्वास्थ्य के क्षेत्र में 79 हजार करोड़ का बजट रखा है। उत्तराखंड की बात करें तो यहां दूरस्थ क्षेत्र तक आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचनी चाहिए। दवाओं की कीमत में सरकार हर संभव कमी कर सकती है। जन औषधि केंद्र ज्यादा खुलने चाहिए। - राघव पंत, केमिस्ट।
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टैक्स में दो स्लैब दिए गए हैं। व्यापारियों को बदलने का विकल्प नहीं दिया गया है। इससे उन्हें दिक्कतें होंगी। पलायन नीति के लिए बजट में कुछ नहीं है। पहाड़ी क्षेत्र में कलस्टर वार विकास करने के लिए विकल्प नहीं रखा गया है। - राजेंद्र सिंह वाणी, व्यवसायी।
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बजट बेहतर रहा है लेकिन कुछ कमियां हैं। बजट में सरकार ने हर वर्ग पर फोकस किया पर महिला सुरक्षा पर कंजूसी बरती है। महिला सुरक्षा पर अधिक खर्च करने की जरूरत थी। पर ऐसा नहीं किया गया है। - अनीता रावत, उपाध्यक्षा, नगर व्यापार मंडल। -------------
युवा वर्ग को बजट से कई उम्मीदें थी, लेकिन उनके अरमानों पर पानी फिर गया है। बेरोजगारी को दूर करने के लिए बजट में कोई प्रावधान नहीं है। इससे युवा वर्ग में भारी निराशा है। बजट में शिक्षा, स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। - ललित सतवाल, पूर्व छात्रसंघ सचिव
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बजट में विभिन्न वर्गों के लिए घोषणाएं की गई हैं लेकिन देश के लाखों युवाओं को नजरअंदाज कर दिया गया है। रोजगार पर स्पष्ट नीति घोषित नहीं की गई है। इससे युवाओं में असमंजस है। जबकि आज बेरोजगारी सबसे बड़ी समस्या बन चुकी है। - दीपक तिवारी, छात्रसंघ उपसचिव (युवा वर्ग)।
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इनकम टैक्स का स्लेब अटपटा है। 30 लाख कमाने वालों को आठ लाख इनकम टैक्स देना पड़ेगा। इससे काम करने वालों का मनोबल कम होगा। रोटी, कपड़ा, मकान सस्ते होने चाहिए। शिक्षा को रोजगारपरक बनाया जाना चाहिए। इससे कुछ हद तक बेरोजगारी दूर हो सकती है। - डा. आरसी पंत, चिकित्सक।