पालिका परिषद ने अल्मोड़ा नगर की सीवरेज, पेयजल उपलब्धता, प्रतिदिन उठने वाले कूड़े आदि के आंकड़े एकत्र कर शहर स्वच्छता योजना का प्रस्ताव शहरी विकास निदेशालय को भेजा है, लेकिन निदेशालय से पालिका परिषद के इस प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिली पाई है। जिससे शहर को स्वच्छ बनाने की योजना पर काम शुरू नहीं हो सका है।
अन्य शहरों की तरह ही अल्मोड़ा नगर में भी गंदे पानी की निकासी, कूड़ा निस्तारण, सीवरेज जैसी समस्याएं आम हैं। स्वच्छता से जुड़ी इन समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए अब तक कोई ठोस योजना नहीं बन सकी है और शहर को स्वच्छ बनाने का सपना अधर में लटका हुआ है। सीवर लाइन एक चौथाई हिस्से में ही बिछी है। अनियोजित निर्माण और बढ़ती जनसंख्या से सफाई की समस्या गहराती जा रही है।
सरकार ने शहर स्वच्छता योजना का प्लान तैयार करने की जिम्मेदारी जर्मनी की जीआईजेड कंपनी को सौंपी है, जबकि आंकड़े एकत्र करने के लिए नगर पालिका परिषद को नोडल एजेंसी बनाया है। शासन के निर्देश पर पालिका परिषद ने जैविक और अजैविक कूड़े का डोर-टू-डोर कलेक्शन, ट्रंचिंग ग्राउंड, सीवर प्रबंधन, बरसाती जल निकासी, बद पड़े कल्वर्ट और नालियों को खोलने, शौचालयों की उपलब्धता, शहर में पानी की आपूर्ति के आंकड़े एकत्र किए हैं।
इसमें लोनिवि, जल संस्थान, पेयजल निगम, स्वास्थ्य विभाग और स्वयं सेवी संस्थाओं का सहयोग पालिका ने लिया। योजना के नगर परियोजना प्रबंधक मनोज कर्नाटक ने बताया कि इस संबंध में प्रस्ताव शहरी विकास निदेशालय को भेजा गया है, लेकिन अब तक प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिली है।
आठ स्थानों पर बनाए जा रहे सामुदायिक शौचालय
स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत पालिका परिषद शौचालयों के जीर्णोद्धार के लिए प्रोत्साहन राशि उपलब्ध करा रही है। पालिका परिषद द्वारा पचास लोगों को 5333 रुपये की दर से यह प्रोत्साहन राशि दी गई है, जबकि आठ स्थानों पर सामुदायिक शौचालयों का निर्माण चल रहा है। जिसमें प्रत्येक शौचालय की लागत करीब 2.46 लाख है।