अल्मोड़ा। सरकारें फलोत्पादन को बढ़ावा देने के दावे जरूर करती हैं, पर पर्वतीय क्षेत्र में सरकारी स्तर पर फलों के विपणन की कोई व्यवस्था नहीं है। जिले में किसान बहुतायत में माल्टा, नीबू, संतरा, गलगल, जामिर, कागजी नींबू का बहुतायत में उत्पादन करते हैं। सरकारी खरीद की दरें बाजार मूल्य से काफी कम होने से इस वर्ष उद्यान सचल केंद्रों में किसी भी किसान ने नींबू प्रजाति के फलों का विपणन नहीं किया। जिससे सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि सरकारी स्तर पर फलों के विपणन के लिए कितने पुख्ता इंतजाम हैं।
जिले के विभिन्न क्षेत्रों में माल्टा, नीबू, संतरा, गलगल, कागजी-नींबू, जामिर आदि से 940 हेक्टेयर क्षेत्र आच्छादित है। धौलादेवी, हवालबाग, ताकुला, ताड़ीखेत, द्वाराहाट, चौखुटिया, लमगड़ा, भैंसियाछाना आदि क्षेत्रों में किसान नींबू प्रजाति के फलों का उत्पादन करते हैं। जिले में प्रतिवर्ष 8331.85 मिट्रिक टन नींबू प्रजाति के फलों का उत्पादन होता है। बाजार में माल्टा 30 रुपए किलो, संतरा 40, नीबू 20 रुपए, मौसमी 60 रुपए, कागजी नींबू 50 रुपए प्रति किलो की दर से बिक रहा है।
सरकारी स्तर पर नींबू प्रजाति के फलों की खरीद के लिए सरकार ने उद्यान विभाग को जिम्मेदारी सौंपी है। सरकार ने ए ग्रेड माल्टा के 16 रुपए प्रति किलो, बी ग्रेड माल्टा के 13 रुपए, ए ग्रेड नीबू, गलगल के आठ रुपए, बी ग्रेड नीबू, गलगल के छह रुपए दाम निर्धारित किए हैं। खरीद के लिए विभाग ने जिले में 11 उद्यान सचल केंद्रों को यह जिम्मेदारी सौंपी थी।
बाजार मूल्य से कम दाम पर सरकारी दरें होने से इस वर्ष कोई भी किसान उद्यान सचल केंद्रों में नींबू प्रजाति के फलों के विपणन के लिए नहीं पहुंचा। इस बारे में जिला उद्यान अधिकारी भावना जोशी का कहना है कि सरकारी खरीद मूल्य कम होने से उद्यान सचल केंद्रों में नींबू प्रजाति के फलों के विपणन को किसान नहीं पहुंचे।