अल्मोड़ा के मटेला में ओखली में च्यूड़े तैयार करतीं महिलाएं।संवाद
अल्मोड़ा। बाजारीकरण के दौर में शहरी इलाकों और कस्बों में अब च्यूड़े कूटने की परंपरा विलुप्त होने के कगार पर है। लोग बाजार से च्यूड़े खरीदकर परंपरा निभा रहे हैं वहीं जिले के कुछ गांवों में ओखली में च्यूड़े तैयार करने की परंपरा अभी भी है। भैयादूज के लिए गांवों में ओखली में च्यूड़े तैयार किए गए।
15 नवंबर को भैयादूज पर्व मनाया जाएगा। भैयादूज के लिए कई गांवों में महिलाओं ने ओखली में सामूहिक रूप से च्यूड़े कूटे जिन्हें भैयादूज पर्व पर पूजा जाएगा। विवाहित महिलाएं भैयादूज पर अपने मायके जाकर भाइयों को च्यूड़े पूजती हैं। ओखली में कूट कर तैयार किए जाने वाले च्यूड़े शुभ माने जाते हैं।
प्रवासी भी साथ ले जाते हैं च्यूड़े
अल्मोड़ा। च्यूड़े काफी स्वादिष्ट होते हैं। दिवाली मनाने पहाड़ आए प्रवासी च्यूड़ों को अपने साथ ले जाते हैं। दिवाली पर घर नहीं आ पाने वाले प्रवासियों को उनके परिजन आज भी डाक के माध्यम से च्यूड़े भेजते हैं। जैंती (सूरी) के पंडित पीतांबर गुरुरानी ने बताया कि कई लोग अमावस्या से पहले ही च्यूड़े कूट लेते हैं और उन्हें महालक्ष्मी पूजा में भी रखा जाता है।
युवा पीढ़ी अपनी संस्कृति से विमुख हो रही है। ओखली में च्यूड़े कूटने की परंपरा से युवा अनजान हैं। ऐसे में वह दिन दूर नहीं जब एक दिन ये संस्कृति भी इतिहास बन जाएगी। - रेनू, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष
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सामूहिक रूप से ओखली में च्यूड़े तैयार करना खुशहाली का प्रतीक है। नई पीढ़ी ज्यादा कष्ट नहीं करना चाहती है। बाजार से च्यूड़े लाकर भैया दूज के दिन भाई को पूज कर सिर्फ रस्म अदायगी की जा रही है। - कमला देवी, मटेला कोसी