अल्मोड़ा। राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस की जीआईसी में हुई अभिमुखीकरण कार्यशाला में मुख्य अतिथि एसएसजे परिसर रसायन विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. एनएस भंडारी ने कहा कि परंपरागत ज्ञान को विज्ञान से जोड़कर संरक्षित रखा जा सकता है। उन्होंने बच्चों में वैज्ञानिक सोच विकसित करने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि शिक्षक बाल वैज्ञानिकों का मार्गदर्शन कर उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करें। बाल विज्ञान कांग्रेस के जिला समन्वयक डा. बीसी पांडेय ने बताया कि कार्यशाला विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग भारत सरकार, यूकास्ट और विद्यालयी शिक्षा के तत्वावधान में आयोजित की गई है। बाल विज्ञान कांग्रेस का इस वर्ष का मुख्य विषय संधारणीय विकास हेतु विज्ञान प्रौद्योगिकी एवं नवाचार है।
इसके आठ विषय प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, खाद्य एवं कृषि, ऊर्जा, स्वास्थ्य स्वच्छता एवं पोषण, जीवन पद्धति एवं आजीविका, आपदा प्रबंधन, परंपरागत ज्ञान पद्धतियां, दिव्यांग व्यक्तियों तक पहुंच हैं।प्रतिभागी शिक्षकों ने उप विषयों पर चर्चा की।
तय हुआ कि मार्गदर्शक शिक्षकों के सहयोग से बाल वैज्ञानिक लघु शोध प्रबंध तैयार करेंगे। अक्तूबर अंतिम सप्ताह में ब्लाक स्तरी और नवंबर प्रथम सप्ताह में जिला स्तरीय बाल कांग्रेस होगी। सभी बाल वैज्ञानिकों को 10 अगस्त तक वेबसाइट में पंजीकरण कराना होगा।
कार्यशाला के विशिष्ट अतिथि जीएस नयाल, प्रकाश त्रिपाठी थे। अध्यक्षता जीआईसी के प्रधानाचार्य डीसी पंत ने की। कार्यशाला में डीएस जीना, डा. ललित जलाल, डा. कपिल नयाल, डा. प्रेम मावड़ी, नवीन सोराड़ी, महेंद्र नयाल, सवित जनौटी, आरएस यादव, मनीष जोशी, आरसी फुलोरिया, पीएस बिष्ट, डीएस कोरंगा, एसएस बिष्ट, आशीष अग्रवाल आदि ने भाग लिया। संचालन जिला अकादमिक समन्वयक जेपी तिवारी ने किया।