अल्मोड़ा। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि नागरिकता संशोधन अधिनियम को लेकर कांग्रेस और वामपंथी दलों पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि सत्ता से बाहर रहने के कारण विपक्षी दल हताश और निराश हैं। उन्होंने आजादी के आंदोलन में कांग्रेस की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि बाल गंगाधर तिलक के अध्यक्ष बनने से पहले कांग्रेस ने कभी भी देश की स्वतंत्रता के लिए प्रस्ताव पारित नहीं किया। उन्होंने कहा नागरिकता संशोधन अधिनियम शरणार्थियों को नागरिकता देने वाला कानून है। कांग्रेस को यह जवाब देना चाहिए कि देश में आए लोगों को शरण दी जाए अथवा नहीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि हाल के दिनों में देश में अर्बन नक्सलियों का वर्ग भाजपा का विरोध कर रहा है।
सर्किट हाउस में पत्रकारों से वार्ता करते हुए उन्होंने कहा कि भारत में राजवंशों के काल से ही शरणागत को आश्रय देने की परंपरा रही है। जब हिटलर ने यहूदियों को जिंदा जलाने का प्रयास किया तो तमाम देशों ने यहूदियों को अपने देश में नहीं घुसने दिया लेकिन भारत ने उन्हें आश्रय दिया। जब चीन ने तिब्बत पर कब्जा कर लिया तब भारत ने तिब्बतवासियों को भी शरण दी जो आज भी यहां शांति से रह रहे हैं। पारसियों को भी भारत ने इसी तरह शरण दी। उन्होंने महात्मा गांधी, जवाहर लाल नेहरू, अबुल कलाम आजाद सहित आजादी के आंदोलन से जुड़े कई कांग्रेस नेताओं के वक्तव्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन नेताओं ने भी पाकिस्तान सहित अन्य देशों से आए शरणार्थियों को देश में आश्रय देने का समर्थन किया था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के विभाजन के वक्त भारत में सिर्फ चार करोड़ मुसलमान थे लेकिन आज उनकी संख्या 20 करोड़ पहुंच गई है। वहीं पाकिस्तान में 23 प्रतिशत हिंदू थे जो अब घटकर सिर्फ 2.7 प्रतिशत रह गए हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में हिंदू, सिख आदि की संख्या लगातार घटती रही है। वहां हिंदू बहू, बेटियों का जबरन धर्मांतरण करवाकर उन्हें प्रताड़ित किया जाता रहा है। इस सब पर कांग्रेस और वामपंथी दल चुप बैठे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि पाकिस्तान, बांगलादेश और अफगानिस्तान मुस्लिम देश हैं। वहां अल्पसंख्यकों को प्रताड़ित किया जा रहा है। उन्होंने कांग्रेस पर वार करते हुए कहा कि कांग्रेस आजादी के आंदोलन के दौर से ही फूट करो और राज करो का सिध्दांत अपनाती रही है। आज भी इसी सिध्दांत पर चल रही है। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि 1885 में ह्यूम द्वारा बनाई गई कांग्रेस आजादी के आंदोलन के दौरान भी अंग्रेजों की सत्ता के लिए सेफ्टी वॉल की तरह काम करती थी। वह बोले 1923 में शौकत अली बंधुओं को वंदे मातरम गाने की तक अनुमति नहीं मिली थी। सीएम बोले जरूरत इस बात की थी कि आजादी के बाद तुरंत ही इस कानून को लागू कर देना चाहिए था लेकिन ऐसा नहीं हो सका। प्रधानमंत्री मोदी ने साहसिक कदम उठाकर इस कानून को लागू करवाया।
उत्तराखंड में करीब 200 परिवार नए कानून के दायरे में: सीएम
अल्मोड़ा। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि उत्तराखंड में हाल के वर्षों में आए करीब 200 परिवार नागरिकता कानून के दायरे में आ रहे हैं। इनमें कुछ मुस्लिम परिवार भी शामिल हैं। अधिकांश देहरादून में बसे हैं। सीएम बोले कि इन्हें नागरिकता देने में किसी तरह की दिक्कत नहीं होगी। ब्यूरो
मुख्यमंत्री का अल्मोड़ा पहुंचने पर भाजपाईयों ने किया भव्य स्वागत
अल्मोड़ा। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का अल्मोड़ा आगमन पर भाजपाईयों ने भव्य स्वागत किया।
स्वागत करने वालों में विधानसभा उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह चौहान, राज्य मंत्री रेखा आर्या, विधायक सल्ट सुरेंद्र सिंह जीना, विधायक द्वाराहाट महेश नेगी, जिलाध्यक्ष रवि रौतेला, पूर्व जिलाध्यक्ष गोविंद सिंह पिलख्वाल, भाजयुमो प्रदेश अध्यक्ष अध्यक्ष कुंदन लटवाल, डीसीबी अध्यक्ष ललित लटवाल, युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष महेश नयाल, पूर्व नगर महामंत्री विनित बिष्ट, भैरव गोस्वामी, अनिल शाही, अरविंद बिष्ट, देवेंद्र नयाल, अभय साह, मनोज जोशी, अमित साह, राजेंद्र जेसवाल, प्रेम शर्मा, हरीश कनवाल, लता बोरा, चंद्रा जोशी, दीप्ती सोनकर, भुवन जोशी, दर्शन रावत, राजेंद्र बिष्ट, नवीन बिष्ट, अर्जुन बिष्ट, मीना भैसोड़ा, विक्रम बिष्ट, मोहन राम आर्या, गंगा बिष्ट, जगमोहन बिष्ट, इंदुप्रभा जोशी, राधिका जोशी, सुंदर कनवाल समेत अन्य कार्यकर्ता शामिल थे।
मुस्लिम समुदाय के 40 लोगों ने ली भाजपा की सदस्यता
अल्मोड़ा। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की मौजूदगी में सर्किट हाउस में मुस्लिम समुदाय के 40 लोगों ने भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ली। इन लोगों के भाजपा में शामिल होने पर मुख्यमंत्री ने स्वागत किया। भाजपा में शामिल होने वालों में रजा अली अंसारी, महराज अंसारी, एहसान अली अंसारी, हारुन अंसारी, नदीम अंसराी, शाबाद आलम, नाजिम अंसारी, जिसान अंसारी, मो. रफी, शाहिल अंसारी, अमन अंसार, अहमद अनस, असलम खान, नूर हसन, शमशाद, नवाब, शाबाद कुरैशी, इशाक अंसराी, मो. आरीज आदि शामिल हैं।
र् कर रही है। जिसका कोई औचित्य नहीं है।