चौखुटिया (अल्मोड़ा)। चौखुटिया ब्लाॅक से भाजपा की चेतना नेगी प्रमुख की प्रत्याशी होंगी। पार्टी पदाधिकारियों ने रायशुमारी के बाद प्रदेश संगठन को नाम भेज दिए हैं। अब भाजपा कार्यकर्ताओं ने क्षेत्र पंचायत सदस्यों को अपने पक्ष में करना शुरू कर दिया है।
शनिवार को चौखुटिया गेस्ट हाउस में भाजपा मंडल कार्यकर्ताओं की बैठक हुई। इसमें ब्लाॅक प्रमुख पद के लिए दावेदारी करने वाले लोगों के नाम मांगे गए। भाजपा से एक मात्र चेतना नेगी ने ब्लाॅक प्रमुख पद के लिए दावेदारी की जिस पर मौजूद लोगों ने उनके नाम पर सहमति दी। चेतना नेगी बरल सीट से क्षेत्र पंचायत सदस्य निर्वाचित होकर आई हैं। उन्होंने मीना कांडपाल को हराया है। वर्ष 2019 में इस चौखुटिया से कांग्रेस से ब्लाॅक प्रमुख बना था। बैठक में मंडल के चुनाव प्रभारी पूरन संगेला, मंडल अध्यक्ष मुकेश पांडे, सदानंद पांडे, कुलदीप, चंदन बिष्ट, सुभाष बिष्ट, दीपक नेगी, गंगा सिंह रावत मौजूद रहे।
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फोटो विवरण -02एएलएम 04पी- चेतना नेगी।
चौखुटिया ब्लाक से कांग्रेस के महेश लाल वर्मा होंगे ब्लाक प्रमुख के प्रत्याशी
- कनौनी सीट से निर्वाचित हुए हैं महेश लाल वर्मा
संवाद न्यूज एजेंसी
चौखुटिया (अल्मोड़ा)। कांग्रेस ने भी चौखुटिया ब्लाॅक से महेश लाल वर्मा को प्रमुख पद का प्रत्याशी घोषित किया है। प्रत्याशी की घोषणा के बाद क्षेत्र पंचायत सदस्य को अपने पक्ष में करने के लिए प्रयास शुरू कर दिए हैं।
चौखुटिया ब्लाॅक में 95 क्षेत्र पंचायत सदस्य की सीट हैं जिनमें 20 प्रत्याशी निर्विरोध निर्वाचित हो चुके हैं। कांग्रेस ने इस बार महेश लाल वर्मा को चौखुटिया सीट से प्रमुख का प्रत्याशी घोषित किया है। महेश लाल वर्मा कनौनी सीट से क्षेत्र पंचायत सदस्य निर्वाचित हुए हैं। वर्तमान में वह प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सदस्य है। इससे पूर्व वह सहकारी बैंक के सदस्य, पूर्व जिला पंचायत सदस्य के साथ ही मासी व्यापार मंडल के अध्यक्ष भी रहे हैं। इससे पूर्व में भी चौखुटिया से कांग्रेस की किरन बिष्ट ब्लाॅक प्रमुख रही हैं। उन्होंने इस बार पंचायत चुनाव नहीं लड़ा। वह भी महेश लाल वर्मा को समर्थन कर रही हैं। संवाद
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फोटो विवरण -02एएलएम 03पी- महेश लाल वर्मा।
जसपुर सीट से भाजपा ने लहराया परचम
स्याल्दे (अल्मोड़ा)। जिला पंचायत की 16 जसपुर सीट में पहली बार भाजपा के युवा नेता सुरेंद्र नेगी ने जीत दर्ज की है। इस सीट पर हमेशा उक्रांद और कांग्रेस का दबदबा देखने को मिलता था। पहली बार इस सीट के भाजपा की झोली में आने के बाद कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर है। भाजपा के सुरेंद्र नेगी ने कांग्रेस प्रत्याशी दिगंबर धौलाखंडी को 244 मतों से हराया। निर्दलीय उम्मीदवार हृदेश महरा को 1065 मत और राकेश बिष्ट को 921 मत मिले हैं। इस सीट से छह प्रत्याशी चुनावी मैदान में थे। संवाद
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फोटो विवरण-02एएलएम 07पी- सुरेंद्र सिंह नेगी।
चार अगस्त तक दर्ज होंगी आपत्ति
अल्मोड़ा/बागेश्वर। डीएम आलोक कुमार पांडेय ने बताया कि अल्मोड़ा में जिला पंचायत अध्यक्ष का पद महिला के लिए आरक्षित किया गया है। इस अनंतिम प्रस्ताव के खिलाफ आपत्ति कार्यालय सचिव पंचायतीराज उत्तराखंड शासन कक्ष संख्या 19 सोबन सिंह जीना भवन में चार अगस्त तक प्रस्तुत कर सकते हैं। पांच अगस्त को आपत्तियों का निस्तारण करने के बाद छह अगस्त 2025 को आरक्षण का अंतिम प्रकाशन किया जाएगा।
बागेश्वर जिला निर्वाचन अधिकारी पंचायत आशीष भटगांई ने बताया कि अनंतिम प्रस्ताव के खिलाफ लिखित आपत्ति चार अगस्त तक सुबह 9:30 बजे से शाम छह बजे तक प्रस्तुत की जा सकती है। आपत्तियों का निस्तारण पांच अगस्त को होगा। छह अगस्त को आरक्षण का अंतिम प्रकाशन किया जाएगा। इसके बाद किसी भी आपत्ति पर विचार नहीं किया जाएगा। संवाद
दिग्गजों का नहीं चला जादू, कई कद्दावर हुए ढेर
पंचायत चुनाव में हार के बाद मायूस दिख रहे चेहरे
संवाद न्यूज एजेंसी
रानीखेत (अल्मोड़ा)। पंचायत चुनाव की क्षेत्र पंचायत सीटों पर इस बार तस्वीर कुछ अलग नजर आई। भाजपा और कांग्रेस ने भले ही किसी प्रत्याशी को आधिकारिक समर्थन नहीं दिया हो, लेकिन कई ऐसे कद्दावर नेता मैदान में उतरे जो खुद को पार्टी का मजबूत चेहरा बताकर चुनाव लड़ते रहे।
इन नेताओं को उम्मीद थी कि संगठन में अपनी पकड़ और वर्षों की सक्रियता के बूते वे आसानी से जीत दर्ज कर लेंगे लेकिन परिणाम उनके अनुमान के बिल्कुल उलट रहे। कई बड़े चेहरे युवाओं के जोश, जमीनी जुड़ाव और सादगी भरे प्रचार अभियान के आगे टिक नहीं सके। कुछ नेताओं को अपने ही क्षेत्रों के मतदाताओं की नाराजगी झेलनी पड़ी तो कुछ को उनके करीबी ही मात दे गए। इन नतीजों ने यह साफ कर दिया है कि अब जनता सिर्फ नाम या चेहरे नहीं, बल्कि नीयत और काम को देखकर अपना प्रतिनिधि चुन रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि गांव की राजनीति में तेजी से बदलाव हो रहा है। अब मतदाता सजग हो चुका है और वो ऐसे प्रतिनिधियों को तरजीह दे रहा है जो जमीन से जुड़े हों, सेवा भाव रखते हों और दिखावे की बजाय काम में विश्वास करते हों। इस चुनाव ने यह भी संकेत दे दिया कि भविष्य में यदि पार्टियां स्थानीय स्तर पर संगठन को मजबूत नहीं करेंगी और सिर्फ पुराने नामों पर भरोसा करेंगी, तो उन्हें और बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है।