पीपीपी मोड में संचालित सीएचसी शील नर्सिंग होम को अनुबंध का विस्तार न मिलने के चलते एक फरवरी से पूर्व की भांति स्वास्थ्य महकमे के अधीन आ चुका है। सीएचसी करीब सवा तीन साल तक पीपीपी मोड में रहा। इस दौरान सरकारी खजाने पर करोड़ों रुपए का अतिरिक्त भार पड़ने के बावजूद अनुबंधकर्ता जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं दे पाए। जिसके चलते व्यवस्था को लेकर शुरूआती दौर से ही सवाल उठते रहे।
डीजी स्वास्थ्य के साथ हुए शील नर्सिंग होम बरेली के अनुबंध के बाद सामुदायिाक स्वास्थ्य केंद्र 15 नवंबर 2013 से पीपीपी मोड में चला गया था। अनुबंध के आधार पर पीपीपी मोड में एक जनरल सर्जन, फिजिशियन, स्त्री रोग विशेषज्ञ, शिशु रोग विशेषज्ञ, रेडियोलॉजिस्ट, हड्डी रोग विशेषज्ञ, ईएनटी सर्जन, एनिथिसिया, आई सर्जन, दंत रोग विशेषज्ञ और दो जनरल ड्यूटी चिकित्सा अधिकारी सहित कुल 12 विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती अनिवार्य थी, परंतु केंद्र में कभी भी दिखावे भर के कुछ चिकित्सकों को छोड़कर खास सुविधा नहीं मिल पाई। इसी का नतीजा रहा कि भारी जन दबाव के बाद सरकार को सीएचसी को पीपीपी मोड से हटाने का निर्णय लेना पड़ा।