देश में भले ही इस साल सूखे जैसे हालात हैं, परंतु यहां की जनता तो पिछले पांच साल से सूखे की मार झेल रही है। हालात ऐसे हैं कि जहां नजर दौड़ाओ बस सूखा ही सूखा नजर आ रहा है।
यह स्थिति गांव के लिए बनी सड़क के निर्माण कार्य के चलते सिंचाई नहरों के ध्वस्त होने से पैदा हुई है। ग्रामीण नहर की मरम्मत की मांग करते रहे हैं, लेकिन हर तरफ से निराशा के सिवाय कुछ हासिल नहीं हुआ।
चौखुटिया विकास खंड के सुदूरवर्ती ग्राम पंचायत बसरखेत के बसरखेत से लेकर तोक गांव उड़खोला और खौला तक के हालात देखकर पत्थर दिल इंसान भी पसीज जाए। परंतु संवेदन शून्य व्यवस्था गांव में सूखे से मचे हाहाकार के बावजूद खामोश है।
गांव के हर कोने में दूर-दूर तक सूखे पड़े खेत, सड़कों के किनारे के खेतों में भरा निर्माणाधीन सड़क का मलबा, लोगों के चेहरे पर छाई मायूसी और भविष्ष्य की चिंता साफ झलक रही है।
लोगों का कहना है कि पांच साल पहले प्रधानमंत्री सड़क योजना के तहत गांव के लिए सड़क का कार्य शुरू हुआ था तब से गांव की नहरें पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी हैं।
यही हाल पेयजल योजनाओं का है, परंतु कोई सुधलेवा नही है। गांव की चार नहरों में से एक में भी पानी नही है। जिसके चलते खेत खलिहान पूरी तरह से सूख चुके हैं जिसके चलते लोगों के सामने गंभीर समस्या पैदा हो गई है।