अल्मोड़ा। जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालय क्षेत्र ही नहीं पूरी दुनिया में इस वक्त मौसम काफी असामान्य हो गया है और ग्लोबल वार्मिंग का असर दिखाई पड़ रहा है। हिमालय क्षेत्र भी इस सबसे अछूता नहीं है और इस सबका असर ग्लेशियरों और हिमालय की नदियों पर भी पड़ रहा है। विश्व भर के वैज्ञानिकों के लिए यह परिवर्तन बड़ी चुनौती के रूप में सामने है।
इस सबके अध्ययन के लिए जून 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेशनल मिशन ऑन हिमालयन स्टडीज की शुरुआत की और केंद्रीय वन, पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन की ओर से इसकी जिम्मेदारी जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालयन पर्यावरण संस्थान कोसी कटारमल अल्मोड़ा को सौंपी है। इसके तहत देश के नौ हिमालयी राज्यों में 27 शोध परियोजनाओं पर काम शुरू हो चुका है।
पिछले कुछ सालों से दुनिया का मौसम बदल रहा है। उत्तराखंड समेत तमाम इलाकों में अतिवृष्टि और बादल फटने से हर साल भूस्खलन की घटनाएं बढ़ रही हैं। वहीं मैदानी इलाकों में बाढ़ की घटनाएं भी लोगों को प्रभावित करती हैं। गर्मियों में तापमान काफी बढ़ रहा है तो जाड़े में असामान्य ठंड पड़ती है। इस सबका असर हिमालय क्षेत्र में भी दिखाई दे रहा है।
इस बार जाड़े के सीजन में पश्चिमी विक्षोभ के कमजोर पड़ जाने के कारण हिमालय क्षेत्र में बर्फबारी काफी कम हुई। जिससे ग्लेशियरों में पर्याप्त बर्फ जमा नहीं हो सकी। जिसे हिमालय की सेहत के लिए अच्छा संकेत नहीं माना गया। इसी तरह असामान्य मौसम और भूस्खलन की घटनाओं के कारण ग्लेशियर पीछे भी खिसक रहे हैं। इस तरह की सारी घटनाएं वैज्ञानिकों के लिए चुनौती हैं।
उम्मीद की जा रही है कि शनिवार को होने जा रहे जीबी पंत राष्ट्रीय संस्थान के स्थापना दिवस के मौके पर जमा हो रहे वैज्ञानिक इन सब चुनौतियों पर चर्चा करेंगे। विश्व के वैज्ञानिक यह मानते हैं हिमालय में समय-समय पर होने वाले परिवर्तनों आदि के बारे में खास अध्ययन नहीं हुए हैं।
इसे देखते हुए जून 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेशनल मिशन ऑन हिमालयन स्टडीज की स्थापना की। केंद्रीय वन, पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन की ओर से इसकी जिम्मेदारी जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालयन पर्यावरण संस्थान कोसी कटारमल (अल्मोड़ा) को सौंपी गई है।
संस्थान के निदेशक डॉ. पीपी ध्यानी ने बताया कि इस मिशन की स्थापना के बाद हिमालय क्षेत्र में विभिन्न तरह के आंकड़े जुटाने के लिए उत्तराखंड समेत देश के नौ हिमालयी राज्यों में 27 शोध परियोजनाएं शुरू की गई हैं।
इसके लिए केंद्र सरकार की ओर से 100 करोड़ रुपये की राशि मंजूर की गई है। उन्होंने यह भी बताया कि कैलाश भू क्षेत्र में पर्यावरण और विकास के लिए भारत, चीन, नेपाल मिलकर काम कर रहे हैं। इस परियोजना के अंतर्गत भारत की ओर से पिथौरागढ़, बागेश्वर जिलों के सीमांत क्षेत्रों में काम चल रहा है।
अल्मोड़ा। वैज्ञानिकों का कहना है कि मौसम में हो रहे परिवर्तन का मुख्य कारण ग्लोबल वार्मिंग है। जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालय पर्यावरण सतत विकास संस्थान के निदेशक डॉ. पीपी ध्यानी का कहना है कि विश्व स्तर कल कारखानों और अन्य तरह के कार्यों से होने वाले प्रदूषण आदि का असर पूरे विश्व पर पड़ता है। अगर हम उत्तराखंड क्षेत्र विशेष के मौसम में परिवर्तन महसूस करते हैं तो इसकी वजह देश के अन्य इलाकों अथवा दूसरे देशों में होने वाले पर्यावरण असंतुलन संबंधी मानवजनित कार्य भी हो सकते हैं।