1200 हेक्टेयर क्षेत्र के लिए वन विभाग ने 2015 में बनाई थी योजना
रानीखेत (अल्मोड़ा)। पर्यटन नगरी रानीखेत के ऐतिहासिक गोल्फ ग्राउंड से सटा दलमोटी वन रेंज को मिनी अभयारण्य बनाने की महत्वाकांक्षी योजना फाइलों से आगे नहीं बढ़ रही है। पूर्व में कैबिनेट से इस योजना को हरी झंडी भी मिली थी।
रानीखेत क्षेत्र में एक नया पर्यटक स्थल तैयार करने के इरादे से 1200 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले निकटवर्ती दलमोटी वन रेंज को मिनी अभयारण्य बनाने के लिए वन महकमे ने वर्ष 2015 में योजना बनाई। योजना का लक्ष्य दलमोटी वन क्षेत्र को विकसित कर सफारी के जरिये पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देना, जैव विविधता का संरक्षण करना, पक्षियों का संरक्षण कर बर्ड वॉचर्स का केंद्र बनाना आदि था। 2016 में राज्य सरकार ने कैबिनेट से इस योजना को हरी झंडी भी दी और वर्ष 2017 में सत्ता परिवर्तन होने के बाद योजना हाशिये में चले गई और आज तक इसकी तरफ ध्यान नहीं गया।
क्या बोले लोग
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अक्तूबर 2014 में तत्कालीन एसडीएम एपी वाजपेयी ने फ्लोरा एंड फौना फॉर्मूला के तहत दलमोटी वन क्षेत्र को मिनी कॉर्बेट की शक्ल देने का मास्टर प्लान तैयार करवाया था, मगर कैबिनेट की मंजूरी के बाद भी प्रस्ताव में शामिल योजना धरातल में नहीं आ सकी। जो अनदेखी है।
::: कमलेश बोरा, व्यापारी
जैव विविधता से लबरेज दलमोटो वन क्षेत्र को कॉर्बेट नेशनल पार्क की तरह विकसित किया जाना चाहिए ताकि रानीखेत में पर्यटन को नई दिशा मिल सकती है।
:: रोहित शर्मा, होटल व्यवसायी
मिनी अभयारण्य के लिए 25 लाख की टोकन मनी भी आई थी लेकिन वर्ष 2017 में सरकार बदलने के बाद टोकन मनी लौट गई। इसके बाद इस दिशा में कार्य आगे नहीं बढ़ सका। इसे पर्यटन के लिहाज़ से विकसित किया जाना चाहिए।
:: कुलदीप कुमार, व्यापारी
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रानीखेत में पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए दलमोटी वन क्षेत्र को विकसित करना ज़रूरी है। सरकार को इस तरफ ध्यान देना चाहिए, ताकि पर्यटकों की संख्या बढ़े। इससे युवाओं को रोजगार मिलेगा।
:: राहुल बिष्ट, मजखाली
कोट:::::
पहले एक ऐसी योजना बनी थी, लेकिन वर्तमान में ऐसी कोई योजना नहीं है। यदि शासन स्तर मिनी अभयारण्य बनाने के कोई दिशानिर्देश मिले, तो उस अनुसार कार्य किया जाएगा।
:: तापस मिश्रा, वन क्षेत्राधिकारी, रानीखेत
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