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कार्बन डाई आक्साइड की मात्रा बढ़ना खतरनाक

Fri, 18 Dec 2015 11:53 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा।
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कुमाऊं विश्वविद्यालय के क्लाइमेट चेंज केंद्र की ओर से एसएसजे परिसर अल्मोड़ा में मौसम परिवर्तन शिक्षा विषय पर तीन दिवसीय गोष्ठी शुरू हो गई है। मुख्य अतिथि कुमाऊं विवि के पूर्व कुलपति प्रो. वीपीएस अरोड़ा ने कहा कि मौसम परिवर्तन की समस्याओं पर गहन चिंतन करना आज के समाज की आवश्यकता है।  गोष्ठी के संयोजक प्रो. एनएस भंडारी ने कहा कि गत 50 वर्षों में एकाएक कार्बन डाई आक्साइड की मात्रा वातावरण में बढ़ गई है जो 400 पीपीएन के बराबर है और एक खतरनाक संकेत करती है।
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यह गैस सीधे वैश्विक तापमान वृद्धि का कारण है और वैश्विक तापमान वृद्धि सीधे मौसम परिवर्तन से जुड़ी है। वैश्विक तापमान के कारण गैसों के उत्सर्जन में त्वरित कमी लाना विश्व की आवश्यकता बन गया है। समस्या के समाधान की दिशा में शिक्षा महत्वपूर्ण कारक है। उन्होंने कहा कि मौसम परिवर्तन शिक्षा को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए और यूनेस्को द्वारा 2005 से इस दिशा में काम किए जा रहे हैं। प्रो. जेएस रावत ने सेंटर की स्थापना तथा उसके कार्यों पर प्रकाश डालते हुए मौसम परिवर्तन के प्रति जागरुकता पर जोर दिया।

डॉ. मंजू सुंदरयाल ने भी विचार रखे। इससे प्रो. अरोड़ा ने गोष्ठी का उद्घाटन किया। संकायाध्यक्ष प्रो. हेमा जोशी ने सभी का आभार जताया। डॉ. मेघा भारती ने संचालन किया। संगोष्ठी में उत्तराखंड सेवा निधि के डॉ. ललित पांडे, प्रो. आरके पांडे, प्रो. एसएस बर्गली, प्रो. एसएस लोधियाल, प्रो. अराधना शुक्ला, एके यादव, डॉ. त्रिभुवन पांडे. डॉ. विपिन जोशी, डॉ. सोनू द्विवेदी, डॉ. मनोज बिष्ट, डॉ. देवेंद्र धामी, डॉ. योगेश जोशी, डॉ. संदीप कुमार, डॉ. विनोद कुमार, भावना कपकोटी, डॉ. किरन बर्गली, डॉ. नीलू लोधियाल, डॉ. मंजुला चंद, डॉ. पुष्पा पंत जोशी आदि मौजूद थे।
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