अल्मोड़ा। धौलादेवी ब्लाॅक में आपदा की भेंट चढ़ी बालीखेत और चगेठी के जल्द दिन बहुरने की उम्मीद है। सिंचाई विभाग को नहरों को संरक्षित करने के लिए शासन से 70 लाख का बजट मिला है। योजना के अस्तित्व में आने से किसान 24 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई कर सकेंगे।
धौलादेवी ब्लॉक में आपदा की मार से क्षतिग्रस्त एक किमी लंबी बालीखेत नहर और 3.5 किमी लंबी नहरों के संरक्षण की पहल तेज हो गई है। रखरखाव के अभाव में दोनों नहरें 15 वर्षों से क्षतिग्रस्त हैं। ऐसे में खेती पर निर्भर बालीखेत, सूरी, बर्धलेख और डुुगरा गांव के 100 से परिवार के लिए खेतों की सिंचाई करना चुनौती बना हुआ है।
सिंचाई विभाग राज्य सेक्टर मद से इन नहरों को 70 लाख रुपये से फिर से अस्तित्व में लाएगा। इसके लिए शासन से राशि भी अवमुक्त हो चुकी है। नहरों का संरक्षण होने से किसान 24 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई कर सकेंगे।
बाढ़ से सुरक्षा के होंगे इंतजाम
विभाग के मुताबिक नहरों को बाढ़ से सुरक्षित रखने के लिए सीसी ब्लॉक, भूकटाव संभावित क्षेत्रों में ब्रेस्ट और रिटेनिंग वाल का निर्माण किया जाएगा। वहीं 16 एमएम की एचडीपीई पाइप के जरिए भी किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जाएगा। इसके साथ ही नहरों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए आरसीसी से कवर किया जाएगा।
सालाना 17.36 लाख रुपये का होगा लाभ
दोनों नहरों के संरक्षित होने पर क्षेत्र के किसान 12 हेक्टेयर भूमि में रबी और 12 हेक्टेयर भूमि में खरीफ फसल का उत्पादन कर सकेंगे। इससे किसानों को सालाना 17 लाख रुपये का अतिरिक्त लाभ मिलेगा। इससे किसानों की आर्थिकी मजबूर होगी। वहीं खेती से मुंह मोड रहे किसान फिर खेती की ओर लौटेंगे।
कोट
- दोनों नहरों को संरक्षित करने के लिए शासन से बजट अवमुक्त हो चुका है। जल्द नहरों के संरक्षण का कार्य शुरू किया जाएगा। योजना के तहत किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध कराया जाएगा ताकि उन्हें खेतों को सींचने के लिए संघर्ष न करना पड़े।
- मोहन सिंह रावत, ईई, सिंचाई खंड, अल्मोड़ा