धान की रोपाई का सीजन शुरू हो गया है, लेकिन सोमेश्वर घाटी क्षेत्र में कोसी और साईं नदियों से बनी सिंचाई नहरों के कई तटबंध आज तक क्षतिग्रस्त पड़े हैं जिससे कई इलाकों में सिंचाई व्यवस्था चरमराई हुई है। अधिकांश काश्तकार रोपाई के लिए बारिश के पानी पर ही निर्भर हैं। अनेक काश्तकार अपने प्रयासों से जेनरेटर लाकर पंप के जरियेए खेतों तक पानी खींच रहे हैं लेकिन सिंचाई विभाग के अफसरों की नींद फिर भी नहीं टूट रही है।
सोमेश्वर घाटी क्षेत्र में धान की अच्छी खेती होती है। करीब पांच दर्जन से अधिक गांवों के लोग खेती पर ही निर्भर हैं। कोसी और साईं नदियों से इन गांवों के लिए दर्जनों सिंचाई नहरें बनाई गई हैं। पर गत दिनों घाटी क्षेत्र में बादल फटने और कोसी, साईं नदी में बाढ़ आने से अधिकांश तटबंध और नहरें क्षतिग्रस्त हो गई हैं। पर सिंचाई विभाग इनको दुरुस्त नहीं कर पा रहा है। इससे काश्तकारों के सम्मुख धान की पौध की रोपाई का संकट हो गया है। काश्तकार बारिश पर ही निर्भर है। क्षेत्र के सबसे बड़े तालखेत और खिरखेत सेरे के काश्तकार बारिश का इंतजार कर रहे हैं।