जीबी पंत पर्यावरण विकास संस्थान के कोसी स्थित ग्रामीण तकनीकी संस्थान परिसर में कोसी नदी के पुनर्जीवीकरण विषय पर हुई गोष्ठी में जिलाधिकारी ईवा आशीष श्रीवास्तव ने कहा कि कोसी नदी के पुनर्जीवीकरण कार्य को एक अभियान के रूप में चलाना होगा। उत्तराखंड पर्वतीय राज्य है, लेकिन बदलते परिवेश में राज्य में बहने वाली अधिकांश नदियों में दिन प्रतिदिन पानी का स्तर कम होते जा रहा जो चिंताजनक है।
उन्होंने बताया कि शासन ने कोसी नदी को पुनर्जीवित करने के लिए अभियान शुरू करने का निर्णय लिया है। हिमालयन पर्यावरण संस्थान और विवेकानंद कृषि अनुसंधान संस्थान का कोसी के पुनर्जीवीकरण कार्य में सहयोग मिलता आ रहा है। कोसी नदी से 350 गांव और 190 सब सेक्टर जुड़े हैं। साथ ही 25 छोटी-छोटी नदियां इसमें मिलती हैं।
उन्होंने नदी के ऊपरी इलाकों में चेकडैम बनाने पर जोर दिया। हिमालयन पर्यावरण संस्थान के निदेशक किरीट कुमार ने कहा कि कोसी नदी के पुनर्जीवीकरण के लिए उसके उद्गम स्थल पिनाकेश्वर (काटली) से जागरूकता अभियान की शुरुआत करनी होगी। उन्होंने कार्यक्रम को मिशन के रूप में चलाने पर बल दिया। संस्थान के वैज्ञानिक डीएस रावत ने कहा कि लोगों को जागरूक करने के साथ ही सफाई पर भी ध्यान देना होगा।
मुख्य विकास अधिकारी मयूर दीक्षित ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को नदियों के पुनर्जीवीकरण के लिए जागरूक करना होगा। सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता डीके पचौरिया ने बताया कि सिंचाई विभाग द्वारा ल्वेशाल, पच्चीसी, चनौदा, ग्वालाकोट, कोसी, क्वारब छह स्थलों का चयन कर जलाशयों के निर्माण के लिए सर्वेक्षण का कार्य कर डीपीआर बनाई जा रही है।
इसके अलावा काकड़ीघाट, भुजान, छड़ा में भी जलाशयों का निर्माण प्रस्तावित है। इस मौके पर हवालबाग के ब्लॉक प्रमुख सूरज सिराड़ी, वन विभाग सिविल सोयम वनाधिकारी आरसी शर्मा, मटेला के प्रधान संजय बिष्ट, देवेंद्र नयाल, प्रधानमंत्री ग्रामीण योजना के अधिशासी अभियंता केसी आर्या ने विचार रखे। इस अवसर पर लोगों को नदी को पुनर्जीवित करने की शपथ दिलाई गई।
नदी किनारे सफाई कर पौधे रोपे गए। अधीक्षण अभियंता डीएस कुटियाल, अधिशासी अभियंता विनोद कुमार, खंड विकासधिकारी पंकज कांडपाल, सिंचाई सहायक अभियंता पीके पाठक, बीपी पांडे, लोनिवि अधिशासी अभियंता एससी पांडे, वनाधिकारी संचिता वर्मा मौजूद थे। संचालन जिला विकास अधिकारी मो. असलम ने किया।