श्री कल्याणिका हिमालय देवस्थानम कनरा डोल आश्रम में आयोजित नौ दिवसीय रामकथा का रविवार को समापन हो गया है। प्रसिद्ध रामकथा वाचक संत मुरारी बापू ने कहा कि प्रभु श्री राम का नाम लेने से ही व्यक्ति भवसागर से पार हो जाता है। श्री राम कथा सतमार्ग पर चलने का संदेश देती है। उन्होंने कहा कि परम की खोज के लिए हमें जागना होगा।
उन्होंने कहा कि साधु, साधु है उसके आगे कोई विशेषण की जरूरत नहीं है। ब्राह्मण के रूप में जन्म लेना और ब्राह्मण होना अच्छी बात है। सेवा धर्म कठिन है लेकिन सबसे ऊंची बात है साधु होना। स्वभाव से साधु हो जाना ही बड़ी बात है। चिता पर लेटना तो सबकी नियति है। किसी साधक के मन में यदि अंधेरा है तो दिव्य पुरुष दीप जला दे तो समझो साधना सफल हो रही है।
उन्होंने एक प्रसंग सुनाते हुए कहा कि एक बार एक साधु से किसी ने पूछा कि आपको नींद अच्छी आती होगी। साधु ने जवाब दिया सोए तो तब पता चले। व्यासपीठ के हिसाब से श्री राम जगत गुरु हैं। दिव्य पुरुष साधक की पात्रता देखकर निर्णय करते हैं। रावण स्वयं निर्णय लेता है। रावण एक शब्द का दस-दस जवाब देता था तभी उसे दशानन भी कहा जाता है।
रावण परम ऊर्जा का एक नाम है। रावण चाहता तो श्री उसके केंद्र में स्थित हो सकती थी, लेकिन उसने अहंकार से इसे पाना चाहा। घर में रसोई बनाने वालों का विरोध नहीं करना चाहिए। गुणवान और संस्कारवान व्यक्ति की संगत हमेशा अच्छी होती है।
उन्होंने कहा कि जब वह कथा सुनाने व्यासपीठ में विराजमान होते हैं तो लगता है सब कुछ कह दिया जब नीचे उतरता हूं तो सोचता हूं कि अभी सब कुछ कहना बाकी रह गया है। उन्होंने शांति के साथ श्री रामचरित मानस की कथा सुनने के लिए विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे श्रद्धालुओं का आभार जताया। इस मौके पर भजन कीर्तन भी हुए।
इससे वातावरण भक्यिमय बना रहा। इस मौके पर पूर्व मुख्यमंत्री सांसद भगत सिंह कोश्यारी, केंद्रीय कपड़ा राज्य मंत्री अजय टम्टा, विधायक और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल, आदि मौजूद थे।
12 साल तक अनवरत चलेगा हवन यज्ञ
डोल आश्रम में सोमवार से 12 सालों तक अनवरत हवन यज्ञ चलेगा। इस अनुष्ठान को पांच पंडित संपन्न कराएंगे।
बाबा कल्याणदास ने सभी का आभार जताया
डोल आश्रम के बाबा कल्याणदास महाराज ने आश्रम में नौ दिनों तक कथा सुनने के लिए सभी श्रद्धालुओं का आभार जताया। उन्होंने कहा कि विभिन्न क्षेत्रों से श्री राम कथा सुनने आश्रम पहुंचे श्रद्धालुओं को यदि कोई परेशानी हुई होगी तो वह इसे अन्यथा न लेकर प्रसाद के रूप में ग्रहण करें। उन्होंने नौ दिनों तक शांति के साथ कथा सुनने के लिए सभी का आभार जताया।