यहां कालू सय्यद बाबा की मजार पर उर्स समारोह का समापन सुबह कुल शरीफ के साथ हुआ। बरेली के वामिक मियां के कलाम ‘सजदा करके कदमे यार पे कुरबां होना यूं लिखा था मेरी किस्मत में मुसलमां होना’ से कार्यक्रम की शुरुआत हुई।
इसके बाद तमाम कलाम पेश किए गए। समारोह के मेहमानों में कलियर से सूफी सईद अहमद लतीफी साबरी और दिल्ली से आ सलीम चिश्ती मरकज, हनीफ वामिकी ने भी शिरकत की। समापन पर मजार के खादिम मो. मोहसिन ने सभी अकीदतमंदों का आभार जताया। बाहर से आए व्यापारी भी दुकानें बढ़ाने लगे हैं।