अल्मोड़ा जिले में वनाग्नि ने सबसे अधिक कहर बरपाया। 287 हेक्टेयर से अधिक जंगल जल गए और 10 लोगों को जंगल की आग में जान गंवानी पड़ी। हैरानी है कि फॉयर सीजन खत्म हो गया, जंगल और कई घर वनाग्नि से उजड़ गए तब जाकर वन विभाग को कंट्रोल बर्निंग के बजट मिला है। फॉयर वॉचरों के मानदेय, पिरूल एकत्र करने और कंट्रोल बर्निंग के लिए विभाग को फायर सीजन खत्म होने के बाद मिला 26 लाख रुपये का बजट सरकारी तंत्र की लापरवाही की पोल खोलने के साथ ही कई तरह के सवाल खड़े कर रहा है।
15 फरवरी से शुरू हुए फायर सीजन के बाद जिले में वनाग्नि ने खूब तांडव मचाया। अब तक 160 घटनाओं में 287 हेक्टेयर जंगल जलकर उजड़ गया। वनाग्नि की चपेट में आने से चार वन कर्मी सहित नौ लोगों की जिंदा जलकर मौत हो गई जबकि बुरी तरह झुलसे एक वन कर्मी को दिल्ली एम्स में उपचार के दौरान काल के गाल में समाना पड़ा। जब जंगल सुलग रहे थे और वनाग्नि की चपेट में आने से लोगों की मौत हो रही थी तब बजट की कमी से विभाग लाचार था। जब वनाग्नि से जंगल जल गए और कई परिवार उजड़ गए तो विभाग को कंट्रोल बर्निंग के साथ ही फॉयर वाचरों के मानदेय और पिरूल एकत्र करने के लिए भारी भरकम बजट जारी किया गया है।
सात लाख रुपये का हुआ नुकसान
फॉयर वॉचरों के मानदेय, उपकरणों की खरीद और कंट्रोल बर्निंग के लिए शासन से मांग की गई थी। बजट नहीं मिलने से फायर वॉचरों को मानदेय नहीं मिल सका। अब बजट जारी हो चुका है। जल्द फॉयर वॉचरों को मानदेय का भुगतान किया जाएगा। उनके लिए जरूरी संसाधनों की भी खरीद होगी।
-दीपक सिंह, प्रभागीय वनाधिकारी, अल्मोड़ा।