अल्मोड़ा। दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सरकार दुग्ध उत्पादकों को चार रुपये प्रति लीटर प्रोत्साहन राशि उपलब्ध कराती है, लेकिन पिछले एक साल से अधिक समय से सामान्य वर्ग के दुग्ध उत्पादकों और पांच माह से एससी/एसटी वर्ग के दुग्ध उत्पादकों को दुग्ध प्रोत्साहन की यह राशि नहीं मिली है। शासन स्तर पर अल्मोड़ा और बागेश्वर जिले के दुग्ध उत्पादकों की करीब 90 लाख राशि बकाया है।
जिले के ग्रामीण इलाकों में गठित 240 दुग्ध समितियों और बागेश्वर जिले की 70 दुग्ध समितियों से करीब सात हजार किसान जुड़े हैं। इनमें से करीब पांच हजार दुग्ध उत्पादक सक्रिय हैं। इन समितियों से दूध इकट्ठा कर वाहनों के जरिये दुग्ध डेरी पातालदेवी अल्मोड़ा लाया जाता है। यहां से आंचल ब्रांड के नाम से दूध, दही, मक्खन, घी, मट्ठा, पनीर आदि उत्पादक उपभोक्ताओं को उपलब्ध कराए जाते हैं। वर्तमान में समितियों के माध्यम से करीब 11 हजार लीटर दूध की आपूर्ति हो रही है। दूध उत्पादन को प्रोत्साहन देने के लिए सरकार समिति से जुड़े दुग्ध उत्पादकों को दूध के मूल्य के अलावा चार रुपये अतिरिक्त प्रति लीटर दुग्ध प्रोत्साहन की राशि उपलब्ध कराती है। एससी/एसटी वर्ग के तीन हजार दुग्ध उत्पादकों को अप्रैल से और सामान्य वर्ग के करीब चार हजार उत्पादकों को जुलाई 2019 से दूध प्रोत्साहन की राशि नहीं मिल सकी है। समय समय पर दुग्ध उत्पादक सरकार से दुग्ध प्रोत्साहन की राशि प्रतिमाह देने की मांग करते रहे हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
दुग्ध उत्पादकों की करीब 90 लाख की दुग्ध प्रोत्साहन की राशि शासन से नहीं मिली है। इसके चलते उत्पादकों को दुग्ध प्रोत्साहन राशि का भुगतान नहीं हो सका है।
- सुनील अधिकारी, सहायक निदेशक, डेरी विकास विभाग, अल्मोड़ा।