अल्मोड़ा के गोविंद बल्लभ पंत पार्क में धराशायी हुआ बोगनबेलियो की बेल से लिपटा प्राचीन देवदार का
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अल्मोड़ा। नगर की पहचान बोगनबेलिया के धराशायी होने से नगर में अब भी शोक छाया है। बृहस्पतिवार को उदय शंकर फोटोग्राफी अकादमी में बोगनबेलिया और देवदार के पेड़ों के गिरकर अस्तित्व खत्म होने की घटना पर शोक सभा का आयोजन किया गया। फोटोग्राफी के लिहाज से पेड़ को यादगार बताकर सभी ने शोक जताया। शोकसभा में वक्ताओं ने कहा कि दिल जीतने वाला बोगनबेलिया के गिरने की घटना प्रकृति और पर्यावरण के लिहाज से भी बड़ी क्षति पहुंची हैं। छायाकारों ने कहा कि इन दोनों ही पेड़ों के मिलन के दृश्य ने कई वर्षों तक अल्मोड़ा की माल रोड से गुजरने वालों का दिल जीता, जब जब बोगनबेलिया में फूल खिलते थे वो देवदार के उस पेड़ को अपने आगोश में ले लेते थे। ऐसा दृश्य बनता कि बरबस ही हर कोई आकर्षित हो जाता। कहा कि छायाकारों के लिए भी दोनों ही पेड़ प्रकृति प्रेमियों के पसंदीदा विषय थे। कई फोटोग्राफरों ने इन पेड़ों के हजारों खूबसूरत फोटो पिछले कई सालों में अपने कैमरे से कैद किए। पिछले कुछ सालों में फोटोग्राफरों के फोटोग्राफ्स के सोशल मीडिया में पोस्ट ने इन पेड़ों को लोगों के बीच और ज्यादा लोकप्रिय बनाया है। पेड़ फोटो के माध्यम से लोगों के बीच जिंदा रहेंगे। इस दौरान वक्ताओं ने नगर पालिका और प्रशासन से पेड़ों को फिर से जीवित करने के लिए उनकी जड़ को फिर रोपने की मांग उठाई। इस मौके पर फोटोग्राफी एकेडमी के थ्रीश कपूर, मनमोहन चौधरी, महेंद्र सिंह मिराल, जयमित्र सिंह बिष्ट, चेतन कपूर, देवेश बिष्ट, इशू चौधरी, वैभव जोशी, रोहित भट्ट, नीरज पांगती, विभा बिष्ट, अर्सलान खान, रमीज खान, मोनू मेनन, कपिल मेहरोत्रा, रचित कुमार, लोकेश साह, नवल वर्मा, आदि रहे।
घरों के आसपास बोगनबेलिया की कटिंग लगाएं
अल्मोड़ा। पालिकाध्यक्ष प्रकाश चंद्र जोशी ने कहा है कि पंत पार्क में स्थित देवदार के पेड़ और बोगनबेलिया की बेल के गिरने से नगर के सौंदर्य और पर्यावरण को अपूर्णीय क्षति पहुंची है। इस नुकसान से नगरवासी, पर्यावरण प्रेमी काफी दुखी हैं। कई नागरिकों ने बोगनबेलिया की कटिंग अपने घरों के आसपास रोपने का निर्णय लिया है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि नगर की सुंदरता के लिए बोगनबेलिया की कटिंग अपने-अपने घरों के आसपास अधिक से अधिक संख्या में लगाएं। इसकी कटिंग पंत पार्क में तीन-चार दिन तक उपलब्ध रहेगी।