अल्मोड़ा। पंचायत चुनाव ने सत्ताधारी भाजपा को बड़ा झटका दिया है। जिले में कांग्रेस 16 जबकि भाजपा को महज 14 सीटों पर जीत नसीब हो पाई है। दोनों दल जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए तिकड़म भिड़ाने की जुगत में जुट गए हैं।
जागेश्वर विधानसभा की बात करें तो यहां पर जिला पंचायत की नौ में से छह सीटों पर कांग्रेस जबकि महज एक सीट पर भाजपा परचम लहरा पाई है। कांग्रेस ने नौगांव, डुंगरा, काभड़ी, ढौरा, खांकर और डोल में जीत हासिल कर भाजपा को चारों खाने चित कर दिया है। इस विस में भाजपा समर्थित केवल एक ही प्रत्याशी जीत पाया है। इससे कांग्रेस में खुशी का माहौल है।
बताया जा रहा है कि घमासान और भीतरघात के चलते भाजपा को जागेश्वर विस में मुंह की खानी पड़ी है। जिला पंचायत सीटों पर भाजपा का किला ढहाने के लिए पूर्व विस अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल की रणनीति अहम मानी जा रही है। लोग कह रहे हैं कि इन नतीजों से 2027 के विस चुनाव में भाजपा के लिए बड़ी चुनौती खड़ी हो सकती है। ये चुनाव कुंजवाल के सियासी कॅरिअर के लिए बूस्टअप साबित हो सकता है।
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खोला सीट में हो गया खेल
जिला पंचायत की खोला सीट काफी चर्चाओं में है। यहां पर भाजपा प्रत्याशी योगेश भट्ट की अप्रत्याशित हार से समर्थकों में उबाल का माहौल है। भाजपा प्रत्याशी योगेश भट्ट के समर्थकों का आरोप है कि पार्टी के नेताओं ने ही उनके प्रत्याशी को हराने में अहम भूमिका निभाई। उनका कहना है कि नेताओं ने पार्टी प्रत्याशी को दरकिनार कर अपने रिश्तेदारों को जिताने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा दिया था। सुनियोजित तरीके से भीतरघात कर भाजपा प्रत्याशी को हराने का काम इस सीट पर हुआ। क्षेत्र के लोग 2027 के चुनाव में इसका बदला लेने की चेतावनी दे रहे हैं।
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बीडीसी में भी कांग्रेस का बोलबाला
जागेश्वर विस के धौलादेवी ब्लॉक में क्षेत्र पंचायत चुनाव में कांग्रेस समर्थित प्रत्याशियों का बोलबाला रहा है। इस चुनाव में कांग्रेस समर्थित 19 प्रत्याशियों की जीत हुई है। इनके अलावा कांग्रेस ने करीब छह बीडीसी सदस्यों को अपने पाले में करने के लिए कसरत तेज कर दी है। ऐसे हालात में भाजपा का ये गढ़ धराशायी होने की आशंका भी लोग लगा रहे हैं। लमगड़ा ब्लॉक में भी भाजपा परेशानियों में घिरी नजर आ रही है।
पालीथौली सीट पर रानीखेत विधायक के भाई ने लहराया परचम
रानीखेत (अल्मोड़ा)। विकासखंड भिकियासैण की क्षेत्र पंचायत सदस्य पद के लिए हुए चुनाव में पालीथौली सीट इस बार सबसे चर्चित और तनावपूर्ण सीटों में से एक रही। यह सीट न केवल स्थानीय सियासत का केंद्र बनी बल्कि विधायक रानीखेत डॉ. प्रमोद नैनवाल की प्रतिष्ठा से भी सीधे तौर पर जुड़ी रही। खास बात ये रही कि इस सीट से स्वयं विधायक के भाई सतीश नैनवाल चुनावी मैदान में थे। उन्हीं की पार्टी भाजपा से भूपेंद्र सिंह बिष्ट ने उन्हें कड़ी टक्कर दी और चुनावी मुकाबले को दिलचस्प बना दिया।
चुनाव प्रचार के दौरान पालीथौली सीट पर सियासी तापमान चरम पर पहुंच गया था। हर कदम पर नई चुनौतियां सामने खड़ी होती रहीं। विरोधियों ने चुनाव को पूरी तरह सियासी दांव-पेंच और आरोप-प्रत्यारोप का अखाड़ा बना दिया था। यहां तक कि प्रत्याशी भूपेंद्र सिंह ने विधायक और उनके भाई पर जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाते हुए पुलिस में तहरीर दी।
उन्होंने चुनाव आयोग को भी शिकायत भेजकर विधायक पर चुनाव में हस्तक्षेप और भाई के पक्ष में प्रचार करने का आरोप लगाया। इन तमाम आरोपों, विवादों और साजिशों के बीच सतीश नैनवाल ने मजबूती से मैदान में डटे रहकर अपनी पकड़ बनाए रखी।
परिणाम आते ही उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी भूपेंद्र सिंह बिष्ट को 185 मतों के बड़े अंतर से पराजित कर साफ संदेश दे दिया कि जनविश्वास के आगे कोई साजिश टिक नहीं सकती। सतीश नैनवाल को कुल 494 मत प्राप्त हुए जबकि भूपेंद्र सिंह बिष्ट 309 मतों पर सिमट गए। 38 मत अवैध घोषित किए गए।
पालीथौली सीट का यह परिणाम विधायक डॉ. प्रमोद नैनवाल के विरोधियों के लिए बड़ा झटका साबित हुआ। यह जीत जहां विधायक के लिए सियासी सुकून लेकर आई है वहीं उनके परिवार के लिए प्रतिष्ठा की जीत बन गई। इस नतीजे ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि जनता का समर्थन अगर साथ हो, तो हर विरोध और आरोप ध्वस्त हो जाते हैं।