कांग्रेस विधानमंडल दल के उपनेता और रानीखेत के विधायक करन महरा ने भाजपा सरकार के उद्यान और कृषि विभाग में एकीकरण के फैसले को तुगलकी फरमान करार दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार का यह कदम पर्वतीय क्षेत्र के काश्तकारों पर कुठाराघात है। यदि सरकार ने यह निर्णय वापस नहीं लिया तो कांग्रेस जनांदोलन तेज करेगी।
यहां पत्रकारों से वार्ता करते हुए उन्होंने कहा कि डबल इंजन की सरकार जन अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतर रही है। प्रदेश में सत्तारूढ़ होने के बाद भाजपा सरकार एक के बाद एक जनविरोधी निर्णय ले रही है। जनता और कांग्रेस कार्यकर्ताओं को जागरुक करने के लिए वह अभियान पर निकले हैं। अल्मोड़ा के बाद नैनीताल समेत कुमाऊं और गढ़वाल मंडल के जिलों का भ्रमण करेंगे और सरकार के उद्यान और कृषि विभाग के एकीकरण के विरोध में लोगों को एकजुट करेंगे।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्र में 80 फीसदी हिस्से में उद्यान और 20 फीसदी में कृषि है। ऐसे में उद्यान विभाग का कृषि विभाग में विलय राज्य के हित में नहीं है। उद्यानीकरण से पर्वतीय क्षेत्र के अधिकांश कृषक जुड़े हुए हैं। 2012 में जहां राज्य में 18 लाख मीट्रिक टन अनाज हुआ, वहीं यह घटकर अब 12 लाख मिट्रिक टन रह गया है। इससे स्पष्ट है कि कृषि जोत कम हो रही है। उन्होंने कहा कि विलय से जहां कर्मचारियों के प्रोन्नति के अवसर समाप्त होंगे वहीं काश्तकारों का भी अहित होगा। इस मौके पर कांग्रेस जिलाध्यक्ष पीतांबर पांडे, राजेंद्र बाराकोटी, तारा चंद्र जोशी, पूरन रौतेला आदि मौजूद थे।