। जिले के बिरखम कस्बे में मूलभूत सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। जबकि बिरखम और इससे लगे आसपास के गांवों का आजादी की लड़ाई में अहम योगदान रहा है। आजादी के दशकों बाद भी बिरखम में आज तक यात्री प्रतीक्षालय और शौचालय नहीं बन सका। कस्बे की नालियां भी काफी लंबे समय से बंद पड़ी हैं।
बिरखम कस्बा नौगांव, सैनोली, चौकुना, कनोली, बाराकोट, दाड़िमी, सीम, सूरी, पुखाड़ी, पुभाऊं, खड़िया, लोहना, थामथोली, बरम, मझाऊं, दन्योली आदि गांवों का केंद्र बिंदु है। वर्तमान में यहां की आबादी 350 के आसपास है। कस्बे से अल्मोड़ा, हल्द्वानी समेत अन्य स्थानों को प्रतिदिन सैकड़ों वाहन गुजरते हैं, लेकिन कस्बे में सार्वजनिक शौचालय और यात्री प्रतीक्षालय न होने से लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
कस्बे में कई स्थानों पर सड़क की नालियां लंबे समय से बंद पड़ी हैं। नालियों का गंदा पानी सड़कों में बहता है। इससे आम लोगों के साथ-साथ स्कूली विद्यार्थियों, पर्यटकों को दिक्कतें झेलनी पड़ती हैं। सामाजिक कार्यकर्ता मनोज सिंह बोरा का कहना है कि आजादी के कई साल गुजर जाने के बाद भी सरकारों ने क्षेत्रीय समस्याओं के समाधान के लिए ठोस प्रयास नहीं किए। क्षेत्र के लोग बाजार में सार्वजनिक शौचालय और यात्री प्रतीक्षालय बनाने की मांग काफी लंबे समय से करते आ रहे हैं लेकिन शासन प्रशासन उदासीन बना हुआ है। बीडीसी सदस्य विक्रम सिंह बताते हैं कि कस्बे की समस्याओं कई बार क्षेत्र पंचायत की बैठक में उठाया जा चुका है। अभी तक समाधान नहीं हो पाया है।